जयपुर : स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, क्योंकि यहीं से बच्चों के भविष्य की नींव रखी जाती है। लेकिन अगर उसी मंदिर में छत, शौचालय और सुरक्षित माहौल जैसी बुनियादी सुविधाएं ही न हों, तो सवाल उठना लाज़िमी है। फिर से एक ऐसी ही तस्वीर किसी दूर-दराज़ के गांव की नहीं, बल्कि राजधानी जयपुर के बीचों बीच शास्त्री नगर इलाके में स्थित भट्टा बस्ती से सामने आई है, जहां सरकारी स्कूल बेहद बदहाल हालात में संचालित हो रहा है।
जयपुर में टीन शेड के नीचे पढ़ रहे बच्चे
स्कूल की पूरी संरचना किसी पिंजरे जैसी दिखाई देती है। पक्की इमारत की जगह लोहे के एंगल और टीन शेड के सहारे कक्षाएं चल रही हैं। इस प्राइमरी स्कूल में जो बच्चे पढ़ने आते हैं वो काफ़ी डर के साए में पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि स्कूल भवन के लिए बजट तो सेंक्शन हो गया है उम्मीद है कि जल्द स्कूल भवन तैयार होगा।
बच्चों में डर का माहौल
वहीं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि यहां अक्सर नशे के आदी लोग पहुंच जाते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है और डर का माहौल बना रहता है। मादूम बच्चों का कहना है कि बुनियादी सुविधाएं भी इस स्कूल में मौजूद नहीं हैं हम उम्मीद करते हैं कि अच्छा स्कूल हमें मिलेगा। बच्चों ने सरकार से सुरक्षित और सुविधाजनक स्कूल भवन की मांग की। उनका कहना है कि वे भी दूसरे बच्चों की तरह अच्छे माहौल में पढ़ना चाहते हैं। स्कूल के ठीक सामने डंपिंग यार्ड होने से पूरे परिसर में बदबू रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है और संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है।
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स्थानीय निवासियों ने भी जल्द नए स्कूल भवन के निर्माण की मांग उठाई। उनका कहना है कि नशेड़ियों की आवाजाही बच्चों पर गलत असर डाल रही है और उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।
स्कूल परिसर के आसपास नशे में इस्तेमाल होने वाली कुछ सिरिंजें पड़ी मिलीं। कैमरा और मीडिया टीम को देखकर वहां मौजूद कुछ संदिग्ध लोग मौके से निकलते नजर आए। राजधानी जयपुर के बीचों-बीच स्कूल के आसपास का यह माहौल कई गंभीर सवाल खड़े करता है। बच्चों के लिए स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण भी होना चाहिए। ऐसे में सवाल है कि क्या शहर के बीच मौजूद स्कूलों के आसपास बच्चों को सुरक्षित और बेहतर माहौल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?
