विदेश पहुंचेगी जयपुर की इको-फ्रेंडली दिवाली, गाय के गोबर से बने 10 लाख दीपकों से रोशन होगा मॉरीशस

राजस्थान के जयपुर में गाय के गोबर से बने 10 लाख पर्यावरण अनुकूल दीपक इस बार मॉरीशस की दिवाली रोशन करेंगे। इन दीपकों में औषधीय पौधों के बीज भी डाले गए हैं।

इस बार दीपावली का पर्व केवल देश ही नहीं बल्कि सात समंदर पार मॉरीशस में भी भारतीय संस्कृति और स्वदेशी महक के साथ मनाया जाएगा। राजस्थान की राजधानी जयपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गाय के गोबर से तैयार 10 लाख पर्यावरण अनुकूल दीपक मॉरीशस भेजे गए हैं, जो वहां की दीवाली को रोशन करेंगे। इसके अलावा देश के 16 अलग-अलग राज्यों में भी करीब साढ़े छह लाख ऐसे दीये पहुंचाए गए हैं। इस अनूठी पहल से जहां एक ओर सदियों पुरानी परंपरा को वैश्विक पहचान मिल रही है, वहीं दूसरी ओर 70 से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाएं और ग्रामीण युवा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

jaipur lamps in Mauritius

दीपकों में औषधीय पौधों के बीज भी डाले गए हैं (सांकेतिक चित्र)

औषधीय बीजों से लैस हैं ये अनूठे दीये: जलने के बाद उगेंगे पौधे

इन दीपकों की सबसे बड़ी खासियत उनका पर्यावरण-अनुकूल होना और उनका अनोखा डिजाइन है। हैनीमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी की सचिव और अंतरराष्ट्रीय सह-संयोजक मोनिका गुप्ता ने बताया कि इन दीपकों के निर्माण में खास सावधानी बरती गई है। इन दीपकों में अश्वगंधा, शतावरी, मोरिंगा (सहजन) और तुलसी जैसे औषधीय पौधों के बीज डाले गए हैं। दीपावली के उपयोग के बाद जब इन दीपकों को मिट्टी या गमले में डाला जाता है, तो अनुकूल परिस्थितियों में ये बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेते हैं। इससे त्योहार पर होने वाले कचरे से मुक्ति मिलती है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। विशेष निर्माण तकनीक के कारण इन दीपकों से तेल का रिसाव नहीं होता और सामान्य उपयोग के दौरान इनका पात्र भी सुरक्षित रहता है।

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