IIT Delhi Student Death: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने एक छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए गठित बाहरी जांच समिति का पुनर्गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता दिल्ली हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता करेंगी। यह घटनाक्रम जांच समिति के अध्यक्ष नियुक्त किए गए उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार द्वारा व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए समिति से खुद को अलग करने के एक दिन बाद हुआ है। इस बीच, परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "एक नई समिति का गठन किया गया है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता इसकी अध्यक्ष हैं। इसके अन्य सदस्यों में एम्स-नयी दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रताप शरण शामिल हैं। इसके अलावा, दो छात्र प्रतिनिधि और IIT-दिल्ली के रजिस्ट्रार भी बाहरी जांच समिति का हिस्सा होंगे।"
छात्र की मौत के बाद खंगाले जा रहे मोबाइल से लेकर काउंसलिंग रिकॉर्ड
22 अगस्त को हुई थी छात्र की मौत
IIT-दिल्ली ने मंगलवार को एमएससी भौतिकी के 31 वर्षीय छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। छात्र ने 22 अगस्त को संस्थान के परिसर में एक इमारत से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। यह घटनाक्रम आक्रोशित छात्रों द्वारा परिसर में प्रदर्शन किए जाने के बाद सामने आया, जिसके चलते प्रशासन ने सोमवार को कक्षाएं स्थगित करने का आदेश दिया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। मामले की प्रारंभिक जांच के अनुसार, 22 अगस्त को छात्र सुबह करीब आठ बजे मेन गेट से IIT-दिल्ली कैंपस में दाखिल हुआ और उसके बाद लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स गया, जहां उसने लिफ्ट से छठी मंजिल तक की दूरी तय की। उसने इमारत के सामने की ओर से कथित तौर पर छलांग लगा दी। छात्र को आनन-फानन में संस्थान के परिसर स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
मोबाइल फोन की भी जांच जारी
इस घटना के संबंध में सुबह करीब 8.30 बजे किशनगढ़ पुलिस थाने में एक पीसीआर कॉल मिली, जिसके बाद पुलिस की एक टीम परिसर में पहुंची। सबूत जुटाने के लिए एक क्राइम टीम और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला इकाई को भी बुलाया गया था। मृतक छात्र की जेब से मिला मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है और उसकी जांच की जा रही है। जांच के तहत पुलिस संस्थान से छात्र के काउंसलिंग रिकॉर्ड और अन्य प्रासंगिक जानकारी भी हासिल कर रही है। संस्थान ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि वह छात्रों के कल्याण को ऐसे माहौल के निर्माण की मूलभूत आवश्यकता मानता है, जहां हर छात्र को लगे कि उसकी बात सुनी जाती है और उसे सहयोग मिलता है।
सेमेस्टर में जीवन कौशल से जुड़े पाठ्यक्रम जोड़े गए
बयान में कहा गया, "चूंकि 2025 में नया पाठ्यक्रम लागू किया गया था, इसलिए छात्रों के तनाव को कम करने के उद्देश्य से प्रथम सेमेस्टर में क्रेडिट का बोझ कम किया गया है, जीवन कौशल से जुड़े पाठ्यक्रम जोड़े गए हैं और प्रथम वर्ष की विभागीय कक्षाओं में छात्रों की संख्या 30 से 60 के बीच सीमित कर दी गई है, ताकि छात्रों के तनाव को कम किया जा सके। सप्ताहांत में होने वाली परीक्षाओं को न्यूनतम किया गया है और क्रेडिट का वितरण लचीला रखा गया है। इसके अलावा, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से बीटेक डिग्री के लिए न्यूनतम सीजीपीए की अनिवार्यता हटा दी गई है।" संस्थान द्वारा सूचीबद्ध अन्य उपायों में परामर्शदाता और संकाय बातचीत, व्यापक मानसिक स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना, लक्षित सहायता, बहु-चैनल शिकायत निवारण, विविधता, समावेशन और पूर्वाग्रह संवेदीकरण शामिल हैं।
