हिमाचल में 25 साल बाद लॉटरी की दोबारा एंट्री; 1999 के बाद अब टेंडर प्रक्रिया से होगा संचालन

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 25 साल बाद राज्य में फिर से लॉटरी शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे सालाना 50 से 100 करोड़ रुपये की आय की उम्मीद है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि लॉटरी का संचालन टेंडर प्रक्रिया से होगा और इसे पंजाब व केरल की तर्ज पर लागू किया जाएगा।

Himachal Pradesh Lottery 2025: हिमाचल प्रदेश सरकार ने 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद राज्य में फिर से लॉटरी शुरू करने का निर्णय लिया है। इससे सरकार को सालाना 50 से 100 करोड़ रुपये तक की आय होने की संभावना जताई जा रही है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने जानकारी दी कि लॉटरी का संचालन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा और इसे पंजाब व केरल जैसे राज्यों की तर्ज पर लागू किया जाएगा।

Industry Minister Harshwardhan Chauhan (File Photo)

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान (फाइल फोटो)

गौरतलब है कि हिमाचल में वर्ष 1999 में प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने लॉटरी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद वर्ष 2004 में वीरभद्र सिंह सरकार ने मणिपुर और भूटान की लॉटरी टिकटों की बिक्री पर भी रोक लगा दी थी। वर्तमान में देश में लॉटरी चलाने वाले प्रमुख राज्यों में केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम, बंगाल, पंजाब, सिक्किम, नगालैंड, मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा शामिल हैं। इस बीच विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि लॉटरी को वैध बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे किसी का भला नहीं होने वाला।

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