धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है चांदी की मछली? मौदहा के कारीगरों का सदियों पुराना हुनर देख रह जाएंगे हैरान

बुंदेलखंड में धनतेरस पर चांदी की मछली खरीदने की एक खास परंपरा है। हमीरपुर के मौदहा में कारीगर पीढ़ियों पुराने हुनर से इन्हें हाथों से तैयार करते हैं।

Maudaha Silver Fish: धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा तो देशभर में है, लेकिन बुंदेलखंड में इस त्योहार का एक खास आकर्षण है। यहां लोग धनतेरस के दिन चांदी की मछली खरीदना भी शुभ मानते हैं। खास बात ये है कि इस मछली की पहचान सिर्फ धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सदियों पुरानी कारीगरी और एक दिलचस्प इतिहास भी जुड़ा है। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मौदहा में तैयार होने वाली चांदी की मछलियां अपनी बारीक नक्काशी और जीवंत बनावट के लिए जानी जाती हैं। दीपावली आते ही इनकी मांग बढ़ जाती है और देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इन्हें खरीदने पहुंचते हैं।

मौदहा की इन मछलियों को देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि ये चांदी से बनी हैं। इनकी चमकती आंखें, बारीक पंख, शरीर पर उकेरी गई नक्काशी और बनावट इन्हें बिल्कुल असली मछली जैसा रूप देती है। यही कारण है कि मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद हाथों से तैयार होने वाली इन कलाकृतियों की अपनी अलग पहचान बनी हुई है।

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