छिंदवाड़ा : मध्यप्रदेश के पांढुर्णा में आयोजित प्रसिद्ध गोटमार मेले में परंपरा के नाम पर हुई पत्थरबाजी ने एक बार फिर इसकी खूनी तस्वीर सामने ला दी। जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थर बरसाए गए, जिसमें 1300 से अधिक लोग घायल हो गए। जिसमें से 7= गंभीर घायलों को नागपुर पहुंचा गया एवं 120 घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। अंततः शाम 6:00 बजे पांडुरंना पक्ष ने झंडा तोड़कर जीत हासिल की।
छिंदवाड़ा के गोटमार मेले में दो पक्षों में भीषण पत्थरबाजी
पत्थरबाजी के दौरान कई लोगों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट गई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल और स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचाया गया। अचानक शुरू हुई पत्थरों की बौछार के बीच कई लोगों को बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।गोटमार मेले की परंपरा में दोनों पक्षों के बीच झंडे पर कब्जे को लेकर मुकाबला होता है। नदी के बीच लगे झंडे को हासिल करने के लिए खिलाड़ी पत्थर चलाते हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते रहे हैं और कई बार मौतें भी हो चुकी हैं।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाने के बावजूद पत्थरबाजी को पूरी तरह रोकना चुनौती बना हुआ है। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर होने वाले इस आयोजन को हिंसा से मुक्त और सुरक्षित स्वरूप कब दिया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक , गोटमार मेले का आयोजन एक लोककथा से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि पांढुर्णा का एक युवक पास के सावरगांव की एक युवती से प्रेम करता था। एक दिन युवक अपनी प्रेमिका को लेकर पांढुर्णा की ओर जा रहा था। दोनों जब जाम नदी के बीच पहुंचे, तो सावरगांव के ग्रामीणों ने उन पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। पत्थरबाजी में दोनों की मौत हो गई। कहा जाता है कि इसी घटना की याद में यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है।
