उत्तराखंड घी-संक्रांति लोकपर्व 2026: देवभूमि उत्तराखंड में आज यानी सोमवार 17 अगस्त को लोकपर्व घी संक्रांति मनाई जा रही है। इस पावन लोकपर्व घी संक्रांति उर्फ घ्यू त्यार, घीं सज्ञान, ओल्गिया त्यार के अवसर पर स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हमारी लोक परंपराएं और पर्व समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। उन्होंने कहा, ये पर्व और त्योहार हमें अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ हमारी अमूल्य परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा
शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा गया कि उत्तराखंड के पारंपरिक पर्व राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक मेलजोल, लोक रीति-रिवाजों और सदियों पुरानी परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम भी हैं।
आज घी का सेवन जरूरी
घी संक्रांति उत्तराखंड के प्रमुख पारंपरिक पर्वों में शामिल है। कुमाऊं और गढ़वाल के अलग-अलग क्षेत्रों में इसे स्थानीय मान्यताओं और रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है। इस लोक पर्व के अवसर पर लोग ईष्ट देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस दिन विशेषतौर पर घी का सेवन और कहीं-कहीं घी का बालों और त्वचा पर क्रीम की तरह इस्तेमाल की भी परंपरा है।
सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देते हैं ये त्योहार
उत्तराखंड की लोक संस्कृति में पारंपरिक त्योहारों की विशेष भूमिका है। घी संक्रांति जैसे पर्व स्थानीय खान-पान, लोक आस्था और सामाजिक परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं। ऐसे अवसर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराने का भी काम करते हैं।
मुख्यमंत्री ने शुभकामना संदेश में ईष्ट देवी-देवताओं से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। साथ ही परिवारों में खुशहाली की भी कामना की।
