Haryana Job Scam: हरियाणा में सरकारी नौकरी के नाम पर 2.41 करोड़ रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। खुद को आरएसएस नेता और पूर्व उपराष्ट्रपति का रिश्तेदार बताकर ठगी करने वाले पांच लोगों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने प्राथमिकी दर्ज की है। पीड़ितों को लगा कि वे लिखित परीक्षा, मेडिकल जांच, पुलिस सत्यापन और नियुक्ति के बाद तीन महीने का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो बाद में फर्जीवाड़ा निकला। सीबीआई ने यह कार्रवाई पानीपत निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर की और आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया।
2023 में शुरु हुई धोखाधड़ी
यह धोखाधड़ी अगस्त 2023 में शुरू हुई थी, जब बैरागी नामक व्यक्ति ने जो मंदिर परिसर से दफ्तर चलाता था, शिकायतकर्ता की मुलाकात कृष्ण नाम के व्यक्ति से कराई और उसे अपना चचेरा भाई बताया। एफआईआर के अनुसार, कृष्ण ने दावा किया कि उसका बड़ा भाई उत्तर भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वरिष्ठ नेता है और परिवार की राजनीतिक पहुंच से विश्वविद्यालयों, अदालतों, विधानसभा और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में उसकी अच्छी पकड़ है।
कपिल नाम के शख्स पर आरोप
आरोप है कि कपिल नाम के व्यक्ति ने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर और पूर्व उपराष्ट्रपति का भतीजा बताया। उसने नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें और सीबीआई वर्दी में फर्जी पहचान-पत्र दिखाए। इन लोगों ने एफसीआई में सुपरवाइजर पद के लिए 14 लाख, क्लर्क के लिए 12 लाख और चपरासी के लिए 8 लाख रुपये मांगे। शिकायतकर्ता ने सुपरवाइजर पद के लिए 14 लाख रुपये दिए। पीड़ितों को सुनील नाम के व्यक्ति द्वारा फर्जी अकाउंट से फर्जी ईमेल और नियुक्ति पत्र भेजे गए। गिरोह ने नई दिल्ली के एक अस्पताल में फर्जी मेडिकल जांच और पुलिस सत्यापन कराया। पीड़ितों को स्थानीय थानों से जैसे फोन भी आए।
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उम्मीदवारों को दी तीन महीने की ट्रेनिंग
उम्मीदवारों को सिरसा के पनिहारी में एफसीआई गोदाम बताकर एक जगह पर तीन महीने के प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया। वहां 25 से 30 उम्मीदवारों को किराए के मकान में ठहराकर सुबह 10 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक फर्जी प्रशिक्षक ने प्रशिक्षण दिया। गिरोह ने फतेहाबाद में फर्जी परीक्षा केंद्र पर उत्तर पुस्तिकाओं के साथ फर्जी लिखित परीक्षाएं कराईं। ऐसी ही परीक्षाएं सोंधापुर और जींद बस पड़ाव के पास भी हुईं। सुनील ने परीक्षा के लिए हर उम्मीदवार से 2 लाख और नियुक्ति के समय 4 लाख रुपये वसूले। एफआईआर में 11 अन्य पीड़ितों का जिक्र है जिन्होंने 7 लाख से 14 लाख रुपये तक दिए थे। शिकायत में दावा है कि बार-बार कहने पर लगभग 3.5 लाख रुपये वापस भी किए गए थे।
