CSR Donation Case: ED ने डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह और अन्य से जुड़े कथित बोगस CSR डोनेशन रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ED ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान मार्केट ऑपरेटर, ट्रस्टी और बिचौलियों से जुड़े परिसरों को खंगाला गया। ED के मुताबिक, शुरुआती जांच में सैकड़ों करोड़ रुपये के CSR फंड को डायवर्ट करने वाले नेटवर्क का पता चला है। जांच एजेंसी ने इस मामले में PMLA के तहत जांच शुरू की है। यह कार्रवाई मुंबई के जुहू पुलिस स्टेशन में 12 जुलाई 2026 को दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई, जिसमें धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े अपराधों के आरोप हैं।
200 करोड़ के CSR फंड की हेराफेरी का हुआ खुलासा
12वीं पास शख्स ने खुद को डॉक्टर बताया
जांच में एक अहम खुलासा यह हुआ है कि धर्मेंद्र कुमार सिंह के पास कोई मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री या मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नहीं था और उन्होंने सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की थी। इसके बावजूद ED के मुताबिक, उन्होंने करीब तीन दशक तक खुद को डॉक्टर बताया और अपने नाम के साथ 'Doctor' की उपाधि का इस्तेमाल किया। ED का आरोप है कि इसी पहचान और डॉक्टर की सामाजिक विश्वसनीयता का फायदा उठाकर उन्होंने कई चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं खड़ी कीं। इन संस्थाओं के जरिए हेल्थकेयर से जुड़े CSR प्रोजेक्ट्स के नाम पर PSU और निजी कंपनियों से बड़ी रकम जुटाई गई।
CSR के नाम पर फंड डायवर्जन का आरोप
ED की जांच में ट्रस्ट, ट्रस्टी, बिचौलिए, कमीशन एजेंट और उपकरण सप्लायरों का एक नेटवर्क सामने आया है। आरोप है कि सरकारी कंपनियों के सामने वैध CSR प्रोजेक्ट के नाम पर प्रस्ताव रखे जाते थे और CSR फंड हासिल किया जाता था। लेकिन आरोप है कि फंड मिलने के बाद प्रोजेक्ट या तो आंशिक रूप से किए गए या मिले पैसे के अनुपात में काम नहीं किया गया। इसके बाद कथित तौर पर बढ़े हुए वेंडर बिल बनाए गए और अतिरिक्त रकम फर्जी या शेल कंपनियों के जरिए दूसरी जगह भेजी गई। CSR फंड दिलाने में मदद करने वाले बिचौलियों और ब्रोकर्स को भी कथित तौर पर कमीशन और किकबैक दिए गए।
प्राइवेट कंपनियों का पैसा कैश में लौटाने का आरोप
ED को जांच में CSR फंड को घुमाने का एक और तरीका सामने आया है। आरोप है कि निजी कंपनियों से CSR के नाम पर पैसा लेने के बाद उसका बड़ा हिस्सा कैश में वापस कर दिया जाता था। इसके बदले ट्रस्ट कथित तौर पर एक छोटा कमीशन अपने पास रखते थे। यानी कागजों पर CSR के नाम पर पैसा खर्च होता दिखाया जाता था, लेकिन रकम का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर वापस कैश में पहुंच जाता था।
करीब 200 करोड़ रुपये का CSR फंड जांच के घेरे में
ED के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब 200 करोड़ रुपये के CSR फंड को रूट किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि इस रकम में से कितना पैसा वास्तविक CSR गतिविधियों में लगा और कितना कथित तौर पर डायवर्ट, कमीशन या कैश रीसाइक्लिंग के जरिए वापस गया। ED की तलाशी में मिले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों और संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच अभी जारी है।
