दिल्ली : ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी, यूजर के खाते में हेरफेर और रकम निकालने से रोकने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ता तीस हजारी कोर्ट के अधिवक्ता अजय कुमार कसाना हैं। उन्होंने Real11 Fantasy Sports LLP और उससे जुड़े बताए गए लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी। FIR में आरोप लगाया गया है कि ऐप को फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म के तौर पर दिखाया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के मुताबिक इसमें ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ऐसी गतिविधियां हुईं, जिनमें उनके खाते में रकम और जीत का गलत आंकड़ा दिखाया गया।
(सांकेतिक फोटो-Istock)
FIR 18 सितंबर 2026 को स्पेशल सेल थाने में दर्ज की गई। मामले की जांच इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह को सौंपी गई है। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316, 318 और 3(5), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 43 और 66 तथा दिल्ली पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट की धारा 3 लगाई गई हैं। FIR के मुताबिक शिकायतकर्ता अजय कुमार कसाना, तिहाड़ कोर्ट में वकील हैं और पश्चिमी विंग, चैंबर नंबर 790, तिहाड़ कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। शिकायत में उन्होंने बताया कि उन्होंने Real11 Fantasy Sports App का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार यह प्लेटफॉर्म खुद को फैंटेसी स्पोर्ट्स ऐप बताता था, लेकिन वास्तव में इसमें ऑनलाइन आधारित गेमिंग की गतिविधियां चल रही थीं।
शिकायत में ललित यादव और अमित यादव का नाम सामने आया है। ललित यादव के बारे में पता आनंद विहार, नेहरू विहार बताया गया है, जबकि अमित यादव के बारे में भी नेहरू विहार क्षेत्र का पता दर्ज है। FIR में अन्य आरोपियों को अज्ञात बताया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान इस प्लेटफॉर्म पर 1.39 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए। ऐप के डैशबोर्ड पर उन्हें करीब 1.31 करोड़ रुपये की जीत दिखाई गई। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि वह इस रकम को निकाल नहीं सके।
उनके मुताबिक शुरुआत में उन्हें करीब 26 लाख रुपये निकालने की अनुमति मिली, लेकिन इसके बाद कथित तौर पर उनके गेमिंग अकाउंट और ऐप तक पहुंच में दिक्कत आने लगी। शिकायत में आरोप है कि ऐप के डैशबोर्ड और यूजर अकाउंट के डेटा में भी हेरफेर किया गया, जिससे उन्हें अपनी वास्तविक ट्रांजैक्शन और जीत का सही हिसाब नहीं मिल सका।
शिकायत में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में उनका वित्तीय नुकसान 4.34 करोड़ रुपये से ज्यादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म पर यूजर को ज्यादा कमाई दिखाकर उसे पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था और बाद में रकम निकालने में परेशानी पैदा की जाती थी। FIR में अलग से कुछ संदिग्ध ट्रांजैक्शन का विवरण भी दिया गया है। इसमें विभिन्न तारीखों पर Paytm और HDFC Bank से जुड़े डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन दर्ज हैं। शिकायत में ऐसे कई ट्रांजैक्शन का जिक्र है, जिनमें करीब 48 हजार से 78 हजार रुपये तक की रकम शामिल है।
बैंक ट्रांजैक्शन की भी जानकारी दी गई
FIR में दिए गए विवरण के मुताबिक कई ट्रांजैक्शन मार्च 2025 और जुलाई-अगस्त 2025 के दौरान हुए। शिकायत में Paytm और HDFC Bank के अलग-अलग कार्ड/ट्रांजैक्शन रेफरेंस का उल्लेख किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड में एक जगह कुल 5.20 लाख रुपये की फ्रॉड अमाउंट का विवरण भी दर्ज है, जबकि शिकायतकर्ता ने पूरी शिकायत में अपना कुल नुकसान 4.34 करोड़ रुपये से अधिक बताया है। यानी FIR में अलग-अलग स्तर पर बताए गए रकम के आंकड़ों को जांच के दौरान ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना है।
पहले भी साइबर पोर्टल पर शिकायतें
FIR में दर्ज शिकायत के मुताबिक इस कंपनी के खिलाफ पहले भी शिकायतें सामने आई थीं। शिकायत में National Cyber Crime Reporting Portal की कई शिकायतों और acknowledgement numbers का उल्लेख किया गया है।
FIR के मुताबिक शिकायतकर्ता की शिकायत NCRP पर दर्ज शिकायतों में सबसे शुरुआती शिकायतों में से एक थी। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने FIR दर्ज करने और मामले की जांच की मांग की।
गाजियाबाद पुलिस में भी शिकायत
शिकायतकर्ता ने इससे पहले गाजियाबाद पुलिस में भी शिकायत किए जाने की बात कही है। FIR के मुताबिक उनकी शिकायत पहले गाजियाबाद पुलिस के पास गई थी और बाद में मामला IFSO से जुड़ा। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की अदालत का रुख किया। शिकायतकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, तिहाड़ कोर्ट के सामने आवेदन भी दिया।
कोर्ट के आदेश के बाद FIR
FIR के मुताबिक अदालत में Ajay Kumar Kasana Vs Real11 Fantasy Sports LLP शीर्षक से मामला पेश हुआ। अदालत ने SHO को यह पता लगाने का निर्देश दिया कि शिकायत से संबंधित कोई FIR पहले से दर्ज है या नहीं। अगर FIR दर्ज नहीं है तो मामले को हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक तेजी से जांच करने के आदेश दिए गए।
FIR में बताया गया है कि NCRP से भी रिकॉर्ड की पुष्टि की गई और पहले से FIR दर्ज नहीं होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद 15 सितंबर 2026 के आदेश के आधार पर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
इन धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने मामले में BNS की धारा 316, 318 और 3(5) लगाई है। इसके अलावा Information Technology Act की धारा 43 और 66 तथा Delhi Public Gambling Act की धारा 3 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
Delhi Public Gambling Act की धारा 3 जुए से जुड़े प्रावधानों के तहत लगाई गई है। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने सबसे अहम काम ऐप से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, यूजर अकाउंट, सर्वर/डेटा, बैंक और Paytm ट्रांजैक्शन, शिकायतकर्ता की ओर से जमा की गई रकम और ऐप पर दिखाई गई कथित जीत की रकम का मिलान करना होगा। साथ ही FIR में नामजद लोगों की भूमिका और कंपनी के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी।
