दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की महत्वाकांक्षी यमुना रिवरफ्रंट परियोजना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। डीडीए ने इस परियोजना की समयसीमा तय करते हुए घोषणा की है कि यह काम 30 जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। यह परियोजना यमुना बाढ़ मैदानों के पुनर्स्थापन और सौंदर्यीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रहा है। डीडीए अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के पहले चरण में विभिन्न फ्लडप्लेन परियोजनाओं को जोड़ने वाली साइकिल ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है, जो इस साल 31 अक्टूबर तक पूरा किया जाएगा।
30 जून 2026 तक यमुना रिवरफ्रंट का काम होगा पूरा
साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर एक भव्य रिवरफ्रंट विकसित करने की योजना
यमुना की सफाई और बाढ़ मैदानों का पुनरुद्धार दिल्ली के विधानसभा चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा रहा है। भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि हजारों करोड़ खर्च करने के बावजूद यमुना की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह यमुना की सफाई करेगी और साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर एक भव्य रिवरफ्रंट विकसित करेगी।पिछले दो महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने भी यमुना की सफाई को लेकर अलग-अलग बैठकों में चर्चा की है, जिससे इस परियोजना को केंद्र सरकार का पूरा समर्थन मिल रहा है।
साराय काले खां के पास पूर्ववर्ती मिलेनियम बस डिपो की जगह पर 200 मीटर लंबे रिवरफ्रंट का निर्माण किया जा रहा है, जो 25 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा। इसमें एक केंद्रीय पियाज़ा, टोपियरी पार्क, सुंदर नर्सरी की तर्ज पर लोकल शॉपिंग सेंटर, दो पार्किंग स्थल और एक नदी किनारे बना सुंदर प्रॉमेनाड शामिल होगा।
सांस्कृतिक आयोजनों के लिए विशेष स्थान, बैठने की व्यवस्था, फव्वारे, मूर्तियाँ और बाग-बगीचे भी प्रस्तावित हैं।
कुल 22 किमी क्षेत्र का होगा पुनर्विकास
डीडीए की योजना के अनुसार, वज़ीराबाद से ओखला बैराज तक कुल 22 किलोमीटर की यमुना पट्टी का पुनर्विकास किया जा रहा है। इस योजना को 11 विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं में बाँटा गया है, जिनमें से पांच — असीता ईस्ट और वेस्ट, कालिंदी अविरल (जिसमें बानसेरा पार्क, वासुदेव घाट, अमृत जैव विविधता पार्क और यमुना वाटिका शामिल हैं) पहले ही विकसित किए जा चुके हैं। दोनों किनारों पर 21 किमी (पश्चिमी) और 30 किमी (पूर्वी) लंबी साइकिल ट्रैक बनाई जा रही है, जिसे 'ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया जाएगा।
डीडीए ने हाल ही में घोषणा की थी कि साइकिल ट्रैक और पाथवे के लिए जूट की कालीन का उपयोग किया जाएगा, जिससे धूल कम होगी और मिट्टी का संरक्षण होगा। हालाँकि सभी परियोजनाओं को आपस में जोड़ना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। डीडीए अधिकारियों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में अतिक्रमण और अन्य निर्माण परियोजनाएं इस कार्य में बाधा बन रही हैं।
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