Delhi Police Commissioner Sanjay Arora: दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा आज यानी 31 जुलाई को रिटायर होने वाले हैं। अरोड़ा के दो साल के कार्यकाल को संगठित अपराध के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलताओं, रिकॉर्ड मादक पदार्थों की बरामदगी और सुर्खियों से दूर रहकर नेतृत्व करने की उनकी विशिष्ट शैली के लिए याद किया जाएगा।तमिलनाडु कैडर के 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी संजय अरोड़ा ने एक अगस्त, 2022 को राकेश अस्थाना का स्थान लेते हुए दिल्ली आयुक्त का पदभार संभाला था।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा- फाइल फोटो (ANI)
संजय अरोडा का दिल्ली पुलिस कमिश्नर के तौर पर कार्यकाल
न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा के कार्यकाल के दौरान राजधानी में गैंगवार, जबरन वसूली की धमकियां, साइबर धोखाधड़ी, बम विस्फोट की घटनाएं, रोहिणी में दो विस्फोट, नेताओं की गिरफ्तारी और श्रद्धा वाकर हत्याकांड जैसी घटनाएं हुईं। आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी, पहलवानों का विरोध प्रदर्शन और स्वाति मालीवाल हमला जैसे मामले भी उनके शीर्ष पुलिस पद पर रहते हुए सुर्खियों में रहे। फिर भी, उनका कार्यकाल काफी हद तक विवाद-मुक्त और संचालन के लिहाज से स्थिर रहा।
पारंपरिक विदाई परेड के साथ रिटायरमेंट
संजय अरोड़ा को गुरुवार को किंग्सवे कैंप स्थित पुलिस लाइंस में निवर्तमान पुलिस आयुक्तों को दी जाने वाली पारंपरिक विदाई परेड के साथ विदाई दी जाएगी। समारोह का समापन अरोड़ा के संबोधन और उसके बाद प्रतीकात्मक रूप से कार्यभार सौंपने के साथ होगा। वैसे तो उनके सेवा विस्तार की अटकलें जारी हैं, लेकिन बुधवार शाम तक गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया। दिल्ली के गृह विभाग ने इससे पहले 31 जुलाई को अरोड़ा की सेवानिवृत्ति की पुष्टि करते हुए एक अधिसूचना जारी की थी।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन वर्षों में मादक पदार्थों के नेटवर्क पर कार्रवाई को अरोड़ा की प्रमुख उपलब्धियों में से एक बताया। उनके नेतृत्व में दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने 13,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए, जो देश में सबसे बड़े मादक पदार्थों के भंडाफोड़ों में से एक है। कुछ ‘हाई-प्रोफाइल’ मामले अब भी अनसुलझे हैं। इनमें स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइन को भेजे गए बम की धमकी वाले ईमेल शामिल हैं, जिनसे पूरे शहर में दहशत फैल गई।
पिछले साल रोहिणी में हुए दो रहस्यमयी विस्फोटों की अब भी जांच जारी है। सड़क अपराध और साइबर धोखाधड़ी ने पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।अरोड़ा के पूर्ववर्ती के कार्यकाल के दौरान पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) इकाई का कानून-व्यवस्था शाखा में विलय कर दिया गया था, जिसे एक स्वतंत्र इकाई के रूप में बहाल कर दिया गया है। एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य आपातकालीन प्रतिक्रिया और परिचालन दक्षता में सुधार लाना है। अस्थाना मुखर थे और अक्सर मीडिया से जुड़े रहते थे जबकि अस्थाना के विपरीत अरोड़ा ने अपने पूरे कार्यकाल में मीडिया से दूर रहने का रवैया अपनाया। उन्होंने आयुक्त के तौर पर एक भी प्रेस वार्ता को संबोधित नहीं किया, बल्कि आधिकारिक संवाद और प्रेस विज्ञप्तियों के जरिए ही पुलिस बल के काम की बात कही।
कौन बनेगा दिल्ली का अगला पुलिस कमिश्नर
अरोड़ा के उत्तराधिकारी को लेकर संशय बरकरार है। सूत्रों ने बताया कि सरकार इस पद के लिए कैडर और गैर-कैडर दोनों तरह के अधिकारियों पर विचार कर रही है। अगर एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेश) कैडर से बाहर के किसी अधिकारी को चुना जाता है, तो यह लगातार तीसरी नियुक्ति होगी। गुजरात कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी अस्थाना को 2021 में एक साल के सेवा विस्तार के साथ नियुक्त किया गया था। सूत्रों ने बताया कि एजीएमयूटी कैडर के जिन वरिष्ठ अधिकारियों पर वर्तमान में विचार किया जा रहा है, उनमें एस. बी. के. सिंह (1988 बैच), वीरेंद्र सिंह चहल और नुजहत हसन (दोनों 1991 बैच), सतीश गोलचा (1992) और प्रवीर रंजन (1993) शामिल हैं।
संजय अरोड़ा ने इन पदों की संभाली जिम्मेदारी
संजय अरोड़ा अपनी वर्तमान भूमिका संभालने से पहले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के महानिदेशक रह चुके हैं। दिल्ली पुलिस प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति 31 जुलाई, 2022 को हुई, तब वे आईटीबीपी के महानिदेशक के रूप में कार्यरत थे और इस नियुक्ति ने पुलिस बल में कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। तमिलनाडु पुलिस में अरोड़ा का प्रारंभिक करियर वीरप्पन विरोधी अभियानों में उनकी भागीदारी के लिए जाना जाता है। राज्य के विशेष कार्य बल में पुलिस अधीक्षक के रूप में वह उस मिशन का हिस्सा थे जिसके परिणामस्वरूप अंततः 2004 में वीरप्पन को मार गिराया गया। अपनी भूमिका के लिए उन्हें बहादुरी और वीरतापूर्ण कार्य के लिए मुख्यमंत्री के वीरता पदक से सम्मानित किया गया। उसी वर्ष, उन्हें सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक मिला। वर्ष 2014 में, उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति के पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। अरोड़ा के जाने के बाद दिल्ली पुलिस को ऐसे समय में अपने अगले आयुक्त का इंतजार है जब दिल्ली, पुलिस व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क, साइबर खतरों और तेजी से बढ़ती तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रही है।
(इनपुट - भाषा)
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