36 साल बाद वही जगह,वही शख्स और दोबारा सड़क हादसा, इस दफा खुशकिश्मत नहीं रहे बासु देव साउ

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Jan 26, 2023, 07:05 AM IST

munirka road accident: कहते हैं मौत से कौन जीत पाया है। दिल्ली में सब्जी बेच कर गुजर बसर करने वाले बासु देव साउ ने 1986 में मौत को मात दी थी।लेकिन 36 साल बाद मौत का घेरा उनके लिए इतना मजबूत साबित हुआ कि वो उस घेरे को तोड़ ना सके। संयोग की बात यह है कि 36 साल पहले मुनिरका की जिस जगह हादसा हुआ था ठीक 36 साल बाद उसी जगह पर वो 22 जनवरी 2023 को हादसे का एक बार फिर शिकार हुए ।

munirka road accident: 57 साल के बासु देव साउ(Bashu Dev Shau) अब इस दुनिया में नहीं हैं। रविवार यानी 22 जनवरी की रात करीब 10.30 बजे मुनिरका इलाके में एक बीएमडब्ल्यू कार सवार ने टक्कर मार दी थी। अस्पताल ले जाने के क्रम में उनकी मौत रास्ते में ही हो गई थी। लेकिन कहानी इतनी सी भर नहीं है। आज से करीब 36 साल पहले साल 1986 में मुनिरका इलाके में ठीक उसी जगह पर बासु देव साउ हादसे का शिकार हुए. हालांकि वो दुर्घटना इतनी गंभीर नहीं रही कि जान चली जाए ये बात अलग है कि ब्रिटिश हाई कमीशन में कुक की नौकरी कर रहे साउ बेरोजगार हो गए थे। उस हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई थी। करीब पांच साल तक चले इलाज के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी एक बार फिर शुरू की। ठेले पर सब्जी लेकर इलाके में बेचा करते थे और परिवार का भरण पोषण करते थे। साउ का सपना था कि उनकी बेटी मनीषा पढ़ लिखकर टीचर बन जाए।

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1986 में बासु देव साउ मुनिरका की उसी जगह पर हादसे का शिकार हुए थे।

बंगाल से दिल्ली आए थे बासु देव साउ

बासु देव साउ अपने पीछे बेटी मनीषा और पत्नी रोमा को छोड़ गए हैं। वो बेहतरी की तलाश में बंगाल से दिल्ली आए थे। मनीषा बताती हैं कि जब उनके पिता का पहली बार एक्सीडेंट हुआ तो वो पैदा भी नहीं हुई थीं। जब उन्होंने होश संभाला तो अपने पिता से सिर्फ एक बात सुनी की कि उसे कुछ बेहतर करना है। पिता की इच्छा उनके टीचर बनने की थी। मनीषा बताती हैं कि वो बी.एड कर चुकी हैं। लेकिन अब उनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं जो उन्हें टीचर बनते हुए देख सकें। बासु देव साउ की पत्नी बताती हैं कि उनके पति ठेले पर सब्जी बेचकर 14 हजार रुपए प्रति महीने कमा लेते थे। उस 14 हजार में 8 हजार रुपए घर का किराया, 3 से चार हजार खाने में और शेष पैसे बेटी की पढ़ाई में खर्च होता था। अब उनके सामने अंधेरा है।

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