Delhi Building Collapse: दिल्ली के मेहरौली इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। लेकिन पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी भी देखने को मिल रही है। मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है और 9 लोगों को अब तक सुरक्षित बचाया जा चुका है। इस बीच परिजनों ने पुलिस और प्रशासन पर राहत कार्य में देरी और परिवारजनों की स्पष्ट जानकारी नहीं देने के आरोप लगाए हैं।
दिल्ली के महरौली में पांच मंजिला इमारत ढही
परिजनों ने प्रशासन पर उठाए सवाल
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, हादसे के बाद मौके पर मौजूद एक स्थानीय महिला ने दावा किया कि शुरुआती घंटों में पुलिस से ज्यादा स्थानीय लोग बचाव कार्य में सक्रिय दिखाई दिए। उनका कहना था कि पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें अपने परिवार के सदस्यों की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है, जिससे चिंता और बढ़ गई है। महिला ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों ने तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि प्रशासनिक एजेंसियों की कार्रवाई अपेक्षाकृत धीमी नजर आई। उन्होंने यह भी कहा कि इमारत की स्थिति को लेकर पहले शिकायतें की गई थीं, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, पीड़ित लोगों का कहना है कि उनके परिवार के सदस्य मलबे में फंसे हो सकते हैं, लेकिन उन्हें लगातार इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोग अपने परिजनों की जानकारी पाने के लिए मौके पर मौजूद अधिकारियों से सवाल पूछते रहे हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की शिकायत करते दिखाई दिए।
दो लोगों की मौत की आशंका
वहीं विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) संगठन के अध्यक्ष डॉ. जसवंत ने दावा किया कि मलबे में फंसे लोगों में मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब तक नौ से दस लोगों को निकाला गया है और दो लोगों की मौत की आशंका है, लेकिन प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। उन्होंने बचाव कार्य में संसाधनों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए।
मेडिकल छात्रों की कैंटीन पर गिरा मलबा
हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों पर सीधे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। साउथ दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस, एनडीआरएफ, डीडीएमए और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। जिसके बाद से लगातार बचाव अभियान चलाया जा रहा है। डीसीपी ने बताया कि घायलों को बिना किसी देरी के अस्पताल पहुंचाने के लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' बना गया और कई एम्बुलेंस को जाम से बचाते हुए निकाला गया। उन्होंने बताया कि एक पुरानी इमारत का मलबा पास ही बने एक अन्य ढांचे पर गिरा। बताया जा रहा है कि उस जगह पर मेडिकल के छात्रों की एक कैंटीन (मेस) चल रही थी, जहां छात्र खाना खा रहे थे और पढ़ाई कर रहे थे।
जेसीबी से हटाया जा रहा मलबा
एनडीआरएफ के कमांडेंट सुनील कुमार सिंह ने बताया कि शुरुआत में स्थानीय लोगों और पुलिस ने मिलकर 4 से 9 लोगों को जिंदा निकाला। उन्होंने बताया कि उनकी दो टीमें मौके पर तैनात हैं और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी जीवित या मृत व्यक्ति के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। जेसीबी की मदद से भारी मलबे को हटाया जा रहा है और तलाशी अभियान लगातार जारी है।
सिविल डिफेंस के अधिकारियों के अनुसार यह क्षेत्र व्यावसायिक गतिविधियों वाला इलाका है। राहत दलों का कहना है कि जब तक पूरे मलबे की जांच नहीं हो जाती, तब तक बचाव अभियान जारी रहेगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
