Delhi Karnal Namo Bharat Corridor : दिल्ली एनसीआर से आसपास के शहरों को जोड़ने की कवायत तेज है। आने वाले समय में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान हाईस्पीड नमो भारत सेवा से जुड़ेंगे। क्योंकि, दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के बाद दिल्ली-करनाल कॉरिडोर पर काम जल्द ही शुरू होने की संभावना है। अगले 2 महीने में फिनैंशियल सिस्टम को अंतिम रूप दे दिया जा सकता है। नमो भारत चरण-1 के अंतर्गत आरआरटीएस के दिल्ली-पानीपत-करनाल खंड को एनसीआरटीसी डेवलप करेगी। फर्स्ट फेज के अंतर्गत दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर (Delhi-Ghaziabad-Meerut Corridor) वर्तमान में चालू है, जबकि दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर (Delhi-Gurugram-SNB-Alwar Corridor) पर भी काम चल रहा है। एनसीआरटीसी के मुताबिक, तीनों कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां नमो भारत स्टेशन पर मिलेंगे। ऐसे में यात्री बिना स्टेशन बदले एक कॉरिडोर से दूसरे कॉरिडोर तक यात्रा कर सकेंगे। यानी एक बार नमो भारत ट्रेन में सवार होने के बाद आपको अंतिम मील तक स्टेशन से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी और आप सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे।
दिल्ली-पानीपत-करनाल रैपिड रेल कॉरिडोर (फोटो-ट्विटर)
- दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ (Delhi-Ghaziabad-Meerut Rapid Rail)
- दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर (Delhi-Gurugram-Alwar Rapid Rail)
- दिल्ली-पानीपत (Delhi-Panipat Rapid Rail)
नमो भारत की स्पीड कितनी है?
एनसीआरटीसी का दावा है कि नमो भारत नेटवर्क वर्ल्ड क्लास यात्री ट्रांसपोर्ट सर्विस मुहैया करा रहा है, जो बेहद सुरक्षित है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रूट पर नमो भारत की एवरेज स्पीड 160 किमी प्रति घंटा है, जो भारत में किसी भी ट्रेन की सबसे अधिक गति है। इस रूट पर प्रत्येक 15 मिनट में ट्रेनें सेवाएं संचालित हो रही हैं, जिससे यात्रियों ट्रैवल टाइन कम हो रहा है और वे 100 किमी की दूरी महज 45-50 मिनट से कम समय में तय कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली से हरियाणा का प्रस्तावित नमो कॉरिडोर पहले पानीपत तक विकसित होना था, लेकिन डिमांड पर संशोधित करते हुए इसे करनाल तक बढ़ाने का प्लान तैयार किया जा रहा है। 2020 में तात्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल खट्टर ने आरआरटीएस को करनाल तक विस्तारित करने की योजना की घोषणा की थी और यह पिछले साल आवास और शहरी मामलों के मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद ही साकार हुई। विस्तार के साथ, गलियारे की कुल लंबाई 103 किमी (दिल्ली से पानीपत) से बढ़कर करनाल तक 136 किमी. हो गई।
| विवरण | जानकारी |
| परियोजना का नाम | दिल्ली-पानीपत-करनाल रैपिड रेल कॉरिडोर |
| दिल्ली-करनाल रैपिड रेल कॉरिडोर की लंबाई | 136 किमी. |
| दिल्ली-करनाल रैपिड रेल कॉरिडोर के स्टेशन | 16 (पंजाब) |
| दिल्ली-करनाल रैपिड रेल कॉरिडोर के स्टेशन | 5 हरियाणा |
| रैपिड रेल की स्पीड | 160 किमी. प्रति घंटे |
| दिल्ली-करनाल रैपिड रेल कॉरिडोर का प्रकार | अंडरग्राउंड-एलिवेटेड |
| नमो भारत स्टेशन का अंतराल | 6 से 8 किलोमीटर |
यह कॉरिडोर हरियाणा के सोनीपत, गन्नौर, समालखा, पानीपत और करनाल से जोड़ेगा। फिलहाल, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है और इसे दोबारा विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उसी के आधार पर फिर वित्त विभाग के समक्ष और अन्य तकनीकी औपचारिकताओं से गुज़रना होगा। सारी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसका परियोजना का कार्य शुरू होगा।
दिल्ली-करनाल नमो भारत के कितने स्टेशन
पहले प्रस्तावित कॉरिडोर के तहत 17 स्टेशनों का निर्माण होना था, लेकिन संशोधन के बाद इसमें 4 स्टेशन और जुड़ गए, जिससे स्टेशनों की संख्या 21 होगी। यह पूरा कॉरिडोर एलिवेटेड ट्रैक और भूमिगत होगा। इसमें 102.85 किलोमीटर लंबा दिल्ली-पानीपत खंड 91.37 किलोमीटर एलिवेटेड और 11.48 किलोमीटर अंडरग्राउंड होगा, जबकि पानीपत-करनाल विस्तार (33.45 किलोमीटर) पूरी तरह से खंभों के ऊपर होगा।
दिल्ली-करनाल नमो भारत रूट मैप
एनसीआरटीएस ने दिल्ली में इंद्रप्रस्थ, कश्मीरी गेट, झरोखा कलां, भलस्वा चौक, अलीपुर और नरेला स्टेशनों को पहले ही लिस्टेड कर लिया है। इसके बाद सोनीपत में कुंडली, बहालगढ़, मुरथल और गन्नौर स्टेशनों को शामिल किया है। पानीपत में समालखा, पानीपत आईएसबीटी सिवाह, पानीपत प्रस्तावित स्टेशन हैं और पानीपत-करनाल सीमा पर स्थित गंजबार-बडौली-कोहंड भी प्रस्तावित हैं। अंत में करनाल में घरौंदा, करनाल सेक्टर 7 और करनाल आईएसबीटी को स्टेशनों के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
कितने स्टेशन बढ़े?
इस बीच चार नए स्टेशन सोनीपत में केएमपी और बरही, पानीपत में पानीपत सेक्टर 18 और करनाल ज़िले में करनाल बाईपास को कॉरिडोर पर भविष्य के स्टेशनों के रूप में जोड़ा गया है, जिससे कुल स्टेशनों की संख्या 21 हो गई है। आरआरटीएस स्टेशन 6 से 8 किलोमीटर के भीतर विकसित होते हैं, जबकि मेट्रो में 1.5 से 2 किलोमीटर के भीतर स्टेशन बनाया जाता है।
