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Bokaro News : चॉकलेट मांगी, हाथ में थमा दी पिस्तौल...गोली चली और उजड़ गई मां की गोद

गोली लगने के बाद परिजन बच्चे को आनन-फानन में बोकारो जनरल अस्पताल ले गए। इसके बाद उसे चास स्थित मुस्कान अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार में मातम पसरा है।

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बोकारो में पिस्तौल से गोली चलने के कारण बच्चे की मौत

बोकारो : झारखंड के बोकारो में पिस्तौल से गोली चलने के कारण साढ़े तीन साल के मासूम की मौत हो गई। घटना माराफारी थाना क्षेत्र के कर्नल मार्केट स्थित रांची मोहल्ले की है। मृतक की पहचान साहिल राम के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि बच्चा अपने मामा राजेश कुमार से चॉकलेट मांग रहा था। इसी दौरान मामा ने उसे खेलने के लिए पिस्तौल थमा दी। अचानक गोली चलने से बच्चे के सिर में गोली लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना के बाद परिजन बच्चे को आनन-फानन में बोकारो जनरल अस्पताल ले गए। इसके बाद उसे चास स्थित मुस्कान अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार में मातम पसरा है।

मां ने कहा- पिस्तौल असली होने की जानकारी नहीं थी

मृतक की मां शोभा देवी के मुताबिक, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि बच्चे के हाथ में दी गई पिस्तौल असली है। चॉकलेट मांग रहे मासूम के साथ हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

पुलिस ने पिस्तौल जब्त कर शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पिस्तौल को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद बच्चे का मामा अस्पताल से फरार हो गया। हालांकि, मामले में पुलिस की जांच के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।

अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मामा राजेश कुमार के पास पिस्तौल कहां से आई और किन परिस्थितियों में गोली चली। साढ़े तीन साल के बच्चे की मौत के बाद हथियारों को लेकर बरती गई कथित लापरवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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