Ujjain Shipra River Car Accident: उज्जैन की शिप्रा नदी में गिरी कार से तीसरा शव भी मंगलवार को बरामद कर लिया गया। मंगलवार शाम करीब 5:00 बजे कार का पता चला। कार घटनास्थल के पास ही मिली । करीब 1 घंटे रेस्क्यू के बाद क्रेन से कार को बाहर लाया गया। कार की पीछे वाली सीट पर महिला आरक्षक आरती पाल का शव फंसा हुआ था। एसपी प्रदीप शर्मा इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मौके पर मौजूद थे। जैसे ही कार को बाहर लाया गया और महिला आरक्षक का शव निकला, पुलिस के आला अधिकारियों के आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे।
रात भर चले रेस्क्यू में कार का पता नहीं चला
दरअसल उज्जैन की शिप्रा नदी में शनिवार रात करीब 9:00 बजे एक कार ब्रिज से नीचे गिर गई थी। इस सड़क हादसे को प्रत्यक्षदर्शियों ने देखा था। तत्काल पुलिस को सूचना दी। खुद एसपी प्रदीप शर्मा मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू शुरू किया गया। शुरुआत में यह पता नहीं चल पाया था कि कार किसकी है और उसके अंदर कौन बैठा है। रात भर चले रेस्क्यू में कार का पता नहीं चल पाया। रविवार सुबह फिर से रेस्क्यू शुरू किया गया तो पता चला कि कार के अन्दर थाना प्रभारी अशोक शर्मा, सब इंस्पेक्टर मदनलाल निनामा और महिला आरक्षक आरती पाल मौजूद थीं। रविवार को घटना स्थल से करीब 5 किलोमीटर दूर नदी में थाना प्रभारी का शव मिल गया। वहीं सोमवार शाम करीब 5:00 बजे सब इंस्पेक्टर मदन लाल निनामा का भी शव उसी जगह से मिला, जहां से थाना प्रभारी का शव मिला था।
प्रशासन की संवेदनाएं परिवार के साथ
घटना की जानकारी देते हुए एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि बेहद दुखद हादसा है। दो दिन पहले एक गुमशुदा बच्ची को खोजने के लिए थाना उन्हेल में पदस्थ पुलिस के हमारे तीन साथी जा रहे थे । तभी शिप्रा नदी के ब्रिज से कार अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई, जिसमें तीनों मौजूद थे। रविवार को थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव मिला। सोमवार को सब इंस्पेक्टर मदनलाल निनामा का शव खोजा गया और मंगलवार को कार और महिला आरक्षक का शव मिला है। पानी का बहाव तेज था और पानी मटमेंला था इसलिए रेस्क्यू में काफी दिक्कतें आ रही थीं। रेस्क्यू में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोर की मदद ली गई। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और पुलिस प्रशासन की संवेदनाएं परिवार के साथ है । शासकीय तौर पर मिलने वाली सभी सुविधाएं उन्हें तत्काल दी जाएगी।
100 से अधिक लोग लगे थे रेस्क्यू में
बता दें कि घटना का एक सीसीटीवी भी सामने आया था। जिसमे कार ब्रिज से नदी में गिरते हुए साफ दिखाई दे रही थी। कार पूर्व की दिशा से पश्चिम की दिशा की ओर जा रही थी और बाएं हाथ की ओर ब्रिज से अचानक नदी में गिर गई। बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था इसके साथ ही तेज बहाव भी था। यही कारण है कि रेस्क्यू पूरा करने 68 घंटे लगे। रेस्क्यू के दौरान पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों के अलावा एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड जवान, तैराक दल और नगर निगम का अमला जुटा रहा । करीब 100 से अधिक सदस्य इस ऑपरेशन में लगे हुए थे। बारिश का गंदा पानी होने के कारण रेस्क्यू दल को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। कैमरे के ज़रिए भी गोताखोरों ने पता लगाने की काफी कोशिश की लेकिन दिक्कतें आ रही थीं। चुम्बक का इस्तेमाल किया गया लेकिन मिट्टी ज्यादा होने से यह प्रयास भी सफल नहीं हो पाए थे।
