एमपी में 108 एंबुलेंस में 900 करोड़ की गड़बड़ी! गाड़ी पर तीन गुना अधिक खर्च, रोजगार योजना भी सवालों के घेरे में

मध्य प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवाओं में गड़बड़ी और युवाओं को रोजगार दिलाने में नाकामी सामने आई है। मां अंबे कंपनी का पंजीयन दस्तावेजों में गड़बड़ी के चलते रद्द किया गया। 900 करोड़ खर्च के बावजूद सेवाओं पर सवाल उठे हैं। वहीं, लाखों पंजीकृत बेरोजगारों में से बहुत कम को ही रोजगार मिल सका।

MP Assembly Monsoon Session: मध्य प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा और बेरोजगारी से जुड़ी योजनाओं में बड़ी खामियां सामने आई हैं। एंबुलेंस सेवा में भारी खर्च के बावजूद गड़बड़ियां हुई। सरकार की ओर से विधानसभा में बताया गया कि एंबुलेंस संचालन करने वाली कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों से काम लिया, जिस पर केस दर्ज किया गया है। वहीं करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद युवा बेरोजगार ही हैं और श्रमिकों के पंजीकरण में भी भारी गिरावट आई है।

Ambulance - Canva

सांकेतिक फोटो

3 सालों में एंबुलेंस सेवा पर 900 करोड़ खर्च

राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने विधानसभा में बताया कि जिस कंपनी "मां अंबे" को एंबुलेंस सेवा का ठेका दिया गया था, उसके दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ी पाई गई। इस कारण उसका श्रमिक पंजीयन रद्द कर दिया गया है और कंपनी पर भोपाल की अदालत में केस भी दर्ज हुआ है। मंत्री ने बताया कि पिछले तीन सालों में इस सेवा पर सरकार ने 900 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि एक एंबुलेंस की कीमत करीब 15 लाख रुपये होती है। यानी प्रति एंबुलेंस पर औसतन 45 लाख रुपये खर्च हुए, जो सवाल खड़े करता है।

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