Rani Kamalapati: हर कोई खूबसूरत दिखना चाहता है। ताकि अधिक से अधिक लोगों का उसे प्यार मिले, लेकिन देश की कई रानियों की खूबसूरती ही उनके लिए अभिशाप बन गई। ऐसा ही भोपाल की रानी कमलापति के साथ हुआ। राजधानी से 50 किलोमीटर दूर स्थित गिन्नौर गढ़ रियासत के राजा निजाम शाह से उनकी शादी हुई थी। राजा की सात पत्नियां थीं, लेकिन राजा की सबसे प्रिय कमलापति थीं। यह इतनी खूबसूरत थीं, कि इनकी तुलना परियों से की जाती थी। भोपाल में ऐसी कहावत थी कि ताल है, तो भोपाल ताल और बाकी सब हैं तलैया। रानी थी तो कमलापति और सब हैं गधाइयां।
रानी कमलापती
कमलापति की खूबसूरती से राजा निजाम के भतीजे आलम शाह को ईर्ष्या थी। आलम को अपने चाचा की दौलत से भी ईर्ष्या थी। एक शाम आलम शाह ने अपने चाचा निजाम शाह को दावत पर बुलाया था। यहां उसने उनके खाने में जहर मिलाकर उनकी हत्या कर दी।
पति की मौत का बदला लेने को बेचैन थी कमलापति
भतीजे द्वारा निजाम की हत्या की जानकारी मिलने के बाद कमलापति अपने इकलौते बेटे नवल शाह को लेकर गिन्नौर गढ़ से भोपाल के रानी कमलापति महल आ जाती हैं। वह अपने पति की हत्या का बदला लेने के लिए बेचैन रहती हैं, लेकिन सेना और पैसों की कमी की वजह से इसमें असमर्थ रहती हैं। इसी बीच उनका दोस्त मो. खान आता है। वह पैसे लेकर लोगों की मदद किया करता था। ऐसा करके उन्होंने जगदीशपुर पर अपनी हुकूमत कायम कर ली थी।
एक लाख रुपए लेकर मदद करने को तैयार हुआ था रानी का दोस्त
मो. खान एक लाख रुपए देने पर रानी कमलापति की मदद करने के लिए तैयार हुआ था। सौदा तय होने के बाद वह रानी के भतीजे की हत्या कर देता है, लेकिन रानी उसे एक लाख रुपए नहीं दे पाती हैं। इसके बदले में वह उसे भोपाल का एक हिस्सा दे देती हैं। अब मो. खान उस हिस्से पर अपनी हुकूमत चलाने जाता है, तो उसका युद्ध रानी के बेटे नवल शाह से होता है। इस युद्ध में हजारों लोगों की जान चली जाती है। आखिरकार रानी के बेटे की युद्ध में हार हो जाती है और भोपाल पर मो. खान का एकाधिकार हो जाता है।
