Chhindwara Cough Syrup: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कई बच्चों की मौत के सिलसिले में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किए गया है। कथित तौर पर इस डॉक्टर को कफ सिरप लिखने के लिए 10% कमीशन मिला था। राज्य पुलिस ने एक सत्र अदालत को बताया कि डॉ. प्रवीण सोनी को कथित तौर पर मिलावटी कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली तमिलनाडु स्थित कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर से कमीशन मिला था । सोमवार को, तमिलनाडु सरकार ने कंपनी को बंद करने और उसका लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया , जबकि ईडी ने श्रीसन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की।
सांकेतिक फोटो (istock)
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (परासिया) गौतम कुमार गूजर डॉ. सोनी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। अदालत ने 8 अक्टूबर को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि डॉक्टर ने "जानबूझकर एक खतरनाक मिलावटी दवा लिखी, जिससे बच्चों की मौत हो सकती है, जबकि उन्हें दिसंबर 2023 में सरकार के उस निर्देश की जानकारी थी, जिसमें चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसी दवाइयां देने पर रोक लगाई गई थी।
साइडइफेक्ट जानते हुए भी डॉक्टर ने लिखा कफ सिरप
पुलिस द्वारा अदालत में पेश की गई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 दिसंबर, 2023 को भारत सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिशा निर्देश जारी कर निर्देश दिया था कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) न दिए जाएं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है, "इसके बावजूद, डॉ. सोनी ने ऐसी दवाएं और कोल्ड्रिफ सिरप लिखना जारी रखा, जबकि उन्हें पता था कि यह दवा बच्चों में पेशाब रुकने और किडनी फेल होने का कारण बन रही है।"
इसमें कहा गया है कि “उनके इलाज के दौरान अब तक 15 बच्चों की मौत हो चुकी है” और उन्हें “कोल्ड्रिफ सिरप लिखने के लिए कंपनी से 10% कमीशन मिला था।” डॉ. सोनी ने अदालत में आरोपों से इनकार किया। उनके वकील पवन कुमार शुक्ला ने अदालत को बताया कि एक सरकारी डॉक्टर होने के नाते, आवेदक ने "इलाज के दौरान सिर्फ दवाएं लिखी थी।" उन्होंने अदालत को बताया, "दवा का दूषित बैच उस कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था, जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। 35-40 वर्षों से चिकित्सा का अभ्यास करने के बाद, उन्होंने जानबूझकर हानिकारक दवाएं नहीं लिखी। दवा की गुणवत्ता की जांच औषधि नियंत्रक विभाग की जिम्मेदारी है।"
थोक विक्रेताओं पर पुलिस की नजर
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच थोक विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों पर भी केंद्रित होगी। अधिकारी ने बताया, "श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर के मालिक रंगनाथन को मध्य प्रदेश एसआईटी आगे की जांच के लिए तमिलनाडु ले गई है।" डॉ. सोनी, श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर के निदेशकों और जबलपुर स्थित एक थोक विक्रेता के खिलाफ 4 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में, परासिया ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ अंकित सेहालाम ने आरोप लगाया कि जहरीले मिलावटी पदार्थ डाई एथिलीन ग्लाइकॉल युक्त कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से कई बच्चों की मौत हो गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि परासिया अनुमंडल में पांच साल से कम उम्र के कई बच्चों का सामान्य सर्दी, खांसी और बुखार का इलाज परासिया के शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में पदस्थ डॉ. सोनी ने किया था। कफ सिरप पीने के बाद, कुछ बच्चों को पेशाब करने में तकलीफ, सीरम क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर बढ़ गया, और गुर्दे की समस्या होने लगी। उन्हें इलाज के लिए परासिया से नागपुर रेफर किया गया, जहां सितंबर और अक्टूबर में उनकी मौत हो गई।
कोल्ड्रिफ सिरप के होलसेलर और रिटेलर भी बने सह आरोपी
छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप की जांच अब आगे बढ़ती जा रही है पुलिस ने कल न्यू अपना फार्मा के संचालक और होलसेलर राजेश सोनी को एवं अपना फार्मा के फार्मासिस्ट सौरभ जैन को सह आरोपी बनाते हुए हिरासत में लिया है। ड्रग विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर इन दोनों ने इस कफ सिरप की बिक्री का लेखा-जोखा नहीं रखा है एवं बचे हुए सिरप जब्त नहीं कराए थे जिससे साबित होता है कि इन्होंने प्रकरण में साक्ष्य छुपा कर जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया है ।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी होलसेलर डॉ प्रवीण सोनी का भतीजा है । दोनों अभी तक पुलिस की अभिरक्षा में है । पुलिस ने अभी तक अपना फार्मा की संचालक ज्योति सोनी को गिरफ्तार नहीं किया है, ज्योति सोनी डॉक्टर प्रवीण सोनी की पत्नी है । वहीं दूसरी ओर रंगनाथन को लेकर तमिलनाडु पहुंची सीट टीम की जांच ईडी की रेड के कारण स्थगित हो गई । ईडी की रेड जारी रहने के कारण एस ई टी की टीम श्रीसन फार्मा में अपनी जांच नहीं कर पाई अब डी की रेड खत्म होने के बाद ही एस ई टी जरूरी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य एकत्र करेगी ।
छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में जबलपुर प्रशासन एक्शन मोड में
छिंदवाड़ा और बैतूल में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से 25 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जबलपुर जिला प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कटारिया फार्मा कंपनी पर शिकंजा कसा। जांच के दौरान कंपनी में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। खाद्य एवं औषधि विभाग ने बिना अनुमति रखी गई दवाओं के स्टॉक पर सख्ती दिखाते हुए गोदाम और ऑफिस को सील कर दिया।
बताया जा रहा है कि कंपनी द्वारा कई दवाओं का उत्पादन और भंडारण नियमानुसार नहीं किया जा रहा था। नमूने जांच के लिए लैब में भेजे गए हैं। विभाग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अन्य राज्यों को भी अलर्ट किया है। पुलिस ने कंपनी संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
