मध्य प्रदेश के जबलपुर में एटीएस की टीम को बड़ी सफलता मिली है। एटीएस ने यहां अफगानिस्तानी नागरिक सोहबत खान को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि सोहबत खान जाली पासपोर्ट और अन्य फर्जी दस्तावेजों के जरिए जबलपुर में रह रहा था। बताया जा रहा है कि इसके अलावा 10 अन्य अफगानिस्तानी नागरिक जाली पासपोर्ट की सहायता से बंगाल, बिहार और झारखंड में रह रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, एटीएस की टीम ने सोहबत की फोटो के आधार पर जांच शुरू करते हुए गिरफ्तार किया है।
जबलपुर में अफगानी नागरिक जाली पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार (फोटो - Canva)
एक अधिकारी ने बताया कि सोहबत एक फोटो के चलते गिरफ्तार किया गया है। इस फोटो में सोहबत विदेशी पिस्टल के साथ नजर आया, जिसके बाद एटीएस की टीम को मामला संदिग्ध लगा। इसी आधार पर मामले की जांच की गई तो मालूम हुआ है वह अफगानिस्तानी नागरिक है और साल 2015 में भारत आया था। उसने 2020 में जाली पासपोर्ट और कई अन्य दस्तावेज बनवाए थे। एटीएस ने आरोपी को भोपाल के एक एटीएम से गिरफ्तार किया है। अब टीम आरोपी के आतंकी कनेक्शन खंगाल रही है।
वन विभाग के कर्मचारी की मदद से बनवाए फर्जी दस्तावेज
एटीएस की जांच में सामने आया है कि सोहबत के जाली पासपोर्ट बनाने में वन विभाग के कर्मचारी दिनेश गर्ग ने मदद की थी। न केवल जाली पासपोर्ट बल्कि आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज के लिए भी दिनेश और महेंद्र कुमार ने मदद की थी। जाली पासपोर्ट के लिए 10 लाख रुपये दिए जाने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि करीब 10 अफगानिस्तानी नागरिकों के जाली पासपोर्ट बनाए गए हैं, जो बंगाल, बिहार और झारखंड में रह रहे हैं। मामले की जांच में दो अन्य अफगानिस्तानी नागरिकों की पहचान अकबर और इकबाल के रूप में हुई है।
