अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने आवश्यक कार्रवाई के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट उस तीन सदस्यीय SIT ने तैयार की थी,जिसका गठन सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में हस्तक्षेप से पहले किया गया था। राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को मामले की जांच के लिए SIT गठित की थी। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय टीम में आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को सदस्य बनाया गया था।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला।
23 जून को सौंपी थी प्रारंभिक रिपोर्ट
SIT ने जांच के बाद 23 जून को उत्तर प्रदेश शासन को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में मामले को लेकर कई कड़ी संस्तुतियां की गई थीं। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की गई। SIT की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर ही 25 जून को मामले में पहली FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद जांच और अन्य कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।8 लोगों को बनाया गया था नामजद आरोपी
ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में अपराध संख्या 90/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया था। FIR में आठ लोगों को नामजद किया गया था, जबकि अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया था। नामजद आरोपियों में अविनाश शुक्ला,अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल थे।
इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब गृह विभाग की ओर से SIT की अंतिम रिपोर्ट आवश्यक कार्रवाई के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपे जाने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
