गुवाहाटी : असम में बाढ़ की स्थिति में बुधवार को कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन कई जिलों में हजारों लोग अब भी बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। राज्य में इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। इसी बीच असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य में बार-बार आने वाली बाढ़ और नदी कटाव की समस्या को ‘राष्ट्रीय समस्या’ घोषित करने की मांग की है। कांग्रेस के राहत एवं पुनर्वास विभाग के अध्यक्ष प्रांजीत दास के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की और उन्हें इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने कहा कि असम में हर साल बाढ़ और नदी कटाव से बड़े पैमाने पर जनजीवन और अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।
असम में बाढ़ को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने का आग्रह (फोटो-AI)
87 हजार से ज्यादा लोग अब भी प्रभावित
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के बुधवार शाम जारी बुलेटिन के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में शिवसागर और कार्बी आंगलोंग जिलों में बाढ़ के पानी में डूबने से एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। इसके साथ ही इस साल राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 103 हो गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या मंगलवार के करीब 1.13 लाख से घटकर अब 87 हजार से अधिक रह गई है। फिलहाल गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इनमें गोलाघाट में 42 हजार से अधिक, नगांव में करीब 20 हजार और शिवसागर में लगभग 15 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
433 गांव अब भी पानी में डूबे
प्राधिकरण के अनुसार राज्य में 433 गांव अब भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं, जबकि करीब 10,884 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन पांच जिलों में 79 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित कर रहा है, जहां करीब 13,011 प्रभावित लोगों को रखा गया है। पिछले 24 घंटे में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच 96.55 क्विंटल चावल, 18.26 क्विंटल दाल, 5.41 क्विंटल नमक और 204.81 लीटर सरसों का तेल वितरित किया गया है। हालांकि, नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी।
कांग्रेस ने मांगा हाईलेवल टास्क फोर्स
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में कहा कि असम का करीब 40 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र यानी 31.05 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ की आशंका वाला क्षेत्र है। पार्टी के मुताबिक यह राष्ट्रीय औसत 10.2 प्रतिशत से काफी अधिक है।
कांग्रेस ने केंद्र से बाढ़ और नदी कटाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक उच्चस्तरीय कार्यबल गठित करने की मांग की है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
पार्टी का कहना है कि लगातार आने वाली बाढ़ ने किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों की आजीविका पर गंभीर असर डाला है। बड़ी संख्या में परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने केंद्र से इस संकट को केवल राहत और बचाव तक सीमित न रखते हुए इसके स्थायी और वैज्ञानिक समाधान की दिशा में व्यापक कदम उठाने की अपील की है।
