Lucknow News : PFI के दो आरोपियों को मिली जमानत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रखी ये शर्त; ATS ने क्यों किया था गिरफ्तार?

अदालत ने पाया कि मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए दो बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष के 18 गवाहों में से केवल पांच से ही जिरह हो सकी है और निकट भविष्य में भी मुकदमे के जल्द पूरा होने के आसार नहीं हैं।

लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के दो संदिग्ध सदस्यों को जमानत देते हुए कहा है कि लंबे समय तक जेल में निरुद्ध रखना और मुकदमे की धीमी सुनवाई संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने केरल निवासी अनसद बदरुद्दीन और फिरोज खान की आपराधिक अपील पर यह आदेश पारित किया। दोनों आरोपी 17 फरवरी 2021 से जेल में बंद हैं।

Allahabad High Court Lucknow Bench

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ (फोटो-Istock)

अदालत ने पाया कि मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए दो बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष के 18 गवाहों में से केवल पांच से ही जिरह हो सकी है और निकट भविष्य में भी मुकदमे के जल्द पूरा होने के आसार नहीं हैं। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह के लिए 95 तारीखें तय की गईं, लेकिन केवल 11 गवाहों की गवाही पूरी हो सकी और पांच गवाहों से जिरह हुई। पीठ ने यह भी पाया कि एक मुख्य गवाह से जिरह पूरी कराने के लिए कई अवसर दिए जाने के बावजूद ऐसा नहीं हो सका।

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