Lucknow News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सूचना के अधिकार (RTI) कानून को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरटीआई अधिनियम के तहत मांगी गई CCTV फुटेज सीधे तौर पर आवेदक को उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। अदालत ने तर्क दिया कि सीसीटीवी फुटेज में कई संवेदनशील जानकारियां शामिल हो सकती हैं, जो कानून के तहत गोपनीयता और सुरक्षा के अपवादों के दायरे में आती हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला (चित्र साभार: Official Site Allahabad High Court)
फिर कैसे मिल सकती है CCTV फुटेज?
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्देश कुमार चौधरी की पीठ ने शोभित कश्यप द्वारा दायर एक रिट याचिका का निस्तारण करते हुए यह व्यवस्था दी। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति केवल RTI दाखिल करके सीसीटीवी फुटेज मांगता है, तो उसे यह सीधे सप्लाई नहीं की जा सकती। हालांकि, यदि पीड़ित या संबंधित व्यक्ति किसी सक्षम न्यायालय या अधिकृत आयोग के समक्ष कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराता है, तो वह संबंधित फोरम पुलिस या प्रशासन को CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और आवश्यकता पड़ने पर जांच के लिए तलब करने का आदेश दे सकता है।
2025 के RTI आवेदन और 25 हजार जुर्माने की मांग का मामला
यह पूरा मामला याचिकाकर्ता शोभित कश्यप से जुड़ा है, जिन्होंने 20 मार्च 2025 को एक आरटीआई आवेदन दाखिल कर पूरी जानकारी के साथ संबंधित घटना/स्थान की संपूर्ण CCTV फुटेज की मांग की थी। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने सूचना न देने वाले संबंधित जन सूचना अधिकारी (PIO) पर 25,000 रुपये का अधिकतम जुर्माना लगाने और मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने की भी गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए दावा किया था कि सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित रखना नागरिक का अधिकार है।
राज्य सूचना आयोग ने दी धारा 8(1)(g) की दलील
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयोग ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। आयोग ने बताया कि मांगी गई CCTV फुटेज में संवेदनशील जानकारियां हैं, जिससे किसी व्यक्ति की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है या अन्य गोपनीय पहलू उजागर हो सकते हैं। आयोग ने तर्क दिया कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(g) के तहत इस तरह की संवेदनशील जानकारी को सीधे सार्वजनिक या आवेदक को साझा करने से छूट प्राप्त है। हालांकि, यदि कोई कोर्ट या आयोग जांच हेतु इसे मांगता है, तो यह उपलब्ध कराई जा सकती है।
हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता ने अब तक किसी अदालत या आयोग में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी और केवल RTI के जरिए फुटेज मांगी थी। इसलिए याचिका का निस्तारण करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यदि सक्षम फोरम में शिकायत दाखिल करता है, तो संबंधित फोरम साक्ष्य के तौर पर फुटेज मंगाने पर विचार कर सकता है।
