गठबंधन का फैसला अभी बाकी, अजय राय ने पहले ही ठोक दी ताल, क्या पिंडरा बनेगा सीट शेयरिंग का पेच?

नवरात्रि के सप्तमी के दिन अजय राय अपनी कर्मभूमि पिंडरा पहुंचे। उनके साथ सैकड़ों गाड़ियों का काफिला था। पिंडरा की दहलीज पर पहुंचते ही अजय राय सबसे पहले मां नटकेश्वरी देवी ने दरबार पहुंचे और में मत्था टेका। इसके बाद लोगों से संवाद किया। पिंडरा की जनता से अपने पुराने रिश्तों का हवाला दिया और चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। अब सवाल ये है कि जब सपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ ही नहीं तो अजय राय को चुनावी ऐलान की इतनी जल्दी क्यों हैं ? सियासी जानकार इसके पीछे दो वजह बताते हैं।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तस्वीर अभी साफ नहीं। चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग का क्या फॉर्मूला होगा, इसे लेकर पेंच फंसा है। सीट बंटवारे को लेकर दोनों ही पार्टियों अपने-अपने दावें हैं। गठबंधन की डोर सुलझती, उसके पहले ही कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अपनी परंपरागत पिंडरा सीट से चुनावी शंखनाद कर, हलचल मचा दी। अजय राय के इस कदम सिर्फ सियासी आगाज नहीं है, बल्कि शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।

अजय राय की सियासी रणनीति।

अजय राय की सियासी रणनीति।

नवरात्रि के सप्तमी के दिन अजय राय अपनी कर्मभूमि पिंडरा पहुंचे। उनके साथ सैकड़ों गाड़ियों का काफिला था। पिंडरा की दहलीज पर पहुंचते ही अजय राय सबसे पहले मां नटकेश्वरी देवी ने दरबार पहुंचे और में मत्था टेका। इसके बाद लोगों से संवाद किया। पिंडरा की जनता से अपने पुराने रिश्तों का हवाला दिया और चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। अब सवाल ये है कि जब सपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ ही नहीं तो अजय राय को चुनावी ऐलान की इतनी जल्दी क्यों हैं ? सियासी जानकार इसके पीछे दो वजह बताते हैं।

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