गुजरात के अहमदाबाद शहर में शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। अहमदाबाद शहर (पश्चिम) के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) आर.एम. चौधरी ने पात्र विद्यार्थियों को चालू शैक्षणिक वर्ष की आर्थिक सहायता से वंचित रखने के मामले में सोलारिस पब्लिक स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की है। स्कूल पर 10,000 का जुर्माना लगाने के साथ ही सभी आरटीई विद्यार्थियों का विवरण तत्काल पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री जनसंवाद की शिकायत पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई
अभिभावक की शिकायत पर हुआ मामले का खुलासा
यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक अभिभावक ने मुख्यमंत्री के 'जन संवाद मंच' के माध्यम से इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर जब शिक्षा विभाग ने जांच की, तो पता चला कि सोलारिस पब्लिक स्कूल ने अपने यहां पढ़ने वाले आरटीई विद्यार्थियों का विवरण RTE DBMS पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किया था। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल राज्यभर में 80,000 से अधिक विद्यार्थियों को आरटीई के तहत 3,000 रुपयों की सहायता राशि का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन इस स्कूल की लापरवाही के कारण वहां का एक भी बच्चा इस वित्तीय सहायता से लाभान्वित नहीं हो सका।
DEO का कड़ा नोटिस और जुर्माने का प्रावधान
शिक्षा विभाग के 2 दिसंबर 2014 के संकल्प और RTE अधिनियम, 2009 की धाराओं का हवाला देते हुए डीईओ कार्यालय ने स्कूल को नोटिस जारी किया। नोटिस में स्पष्ट किया गया कि नियमों के पहली बार उल्लंघन पर 10,000 रुपये और इसके बाद प्रत्येक अनियमितता पर 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। स्कूल को निर्देश दिए गए हैं कि जुर्माने की राशि दो दिनों के भीतर सरकारी खाते में चालान के माध्यम से जमा कराई जाए और उसी दिन सभी पात्र बच्चों का डेटा पोर्टल पर अपडेट किया जाए। डीईओ कार्यालय ने स्कूल के प्रिंसिपल को स्पष्टीकरण के साथ कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया था, साथ ही चेतावनी दी थी कि तय समय पर उपस्थित न होने पर नियमानुसार एकतरफा सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस कड़े रुख से शहर के अन्य प्राइवेट स्कूलों में भी हड़कंप मच गया है, जो आरटीई के नियमों के पालन में कोताही बरत रहे हैं।
