शहर

अहमदाबाद में ₹8 लाख का गरबा पास घोटाला, फर्जी पास बेच रहे राजस्थान के 2 शातिर गिरफ्तार, ऐसे करते थे खेल

AI और ChatGPT की मदद से असली टिकट जैसे पास तैयार करने का आरोप, इंस्टाग्राम, मेटा विज्ञापनों, व्हाट्सऐप और फर्जी ईमेल के जरिए 686 पास बेचने का दावा किया गया है।

Image

अहमदाबाद में ₹8 लाख का गरबा पास घोटाला

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों के फर्जी पास बेचकर करीब ₹8 लाख की कथित धोखाधड़ी करने के मामले में राजस्थान के दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिए अलग-अलग गरबा आयोजनों के पास कम कीमत पर बेचने का झांसा दिया। शुरुआती जांच में विभिन्न आयोजनों के कुल 686 फर्जी पास तैयार कर बेचने की जानकारी सामने आई है।

अहमदाबाद साइबर क्राइम की डीसीपी लविना सिन्हा के मुताबिक, इस मामले में शिकायत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि ‘वीर राजपूत’ नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट चलाने वाला वीरेंद्र सिंह राठौड़ कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी था। उसका साथी किशन सिंह राठौड़ भी इस गतिविधि में शामिल था। दोनों राजस्थान के रहने वाले हैं।

इंस्टाग्राम पर सस्ते पास का विज्ञापन देकर लोगों को बनाया निशाना

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ‘veer.rajjputt’ नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था। इसके जरिए अहमदाबाद के प्रमुख गरबा आयोजनों के पास कम कीमत पर उपलब्ध कराने के विज्ञापन दिए जाते थे। अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए मेटा प्लेटफॉर्म पर पेड विज्ञापन भी चलाए गए। पुलिस का कहना है कि एक विज्ञापन अहमदाबाद में करीब 40,000 लोगों तक पहुंचा था।

लोगों के संपर्क करने पर आरोपी कथित तौर पर व्हाट्सऐप पर ‘वीर राजपूत’ के नाम से बातचीत करते थे। इसके बाद संबंधित गरबा आयोजनों के नाम से मिलते-जुलते फर्जी ईमेल आईडी बनाकर ग्राहकों को बुकिंग कन्फर्मेशन और पास भेजे जाते थे। इससे खरीदारों को पास के असली होने का भरोसा हो जाता था।

ChatGPT और AI की मदद से बनाए फर्जी पास

डीसीपी लविना सिन्हा के अनुसार, आरोपियों ने असली टिकटों जैसा दिखने वाला डिजाइन तैयार करने के लिए ChatGPT और AI टूल्स का इस्तेमाल किया था। इसके लिए वे गरबा आयोजनों के आधिकारिक वेबपेज या सोशल मीडिया से पास की तस्वीर लेते थे और उसे AI टूल में डालकर उसी तरह का नया पास बनाने के निर्देश देते थे।

पुलिस के मुताबिक, इन निर्देशों में बैकग्राउंड को समान रखने, नई बुकिंग आईडी और रेफरेंस नंबर बनाने तथा पास को वेन्यू पर ही चेक किए जाने की जानकारी शामिल करने को कहा जाता था। कथित तौर पर QR कोड और अन्य तकनीकी विवरणों का इस्तेमाल भी किया गया, ताकि पास देखने में वास्तविक लगे।

पुलिस का कहना है कि कई खरीदारों को धोखाधड़ी का पता तब चला, जब वे गरबा स्थल पर पहुंचे और उनके पास को अमान्य बताया गया। कुछ मामलों में शिकायतें इसी वजह से देर से सामने आईं।

एक महीने में 686 पास बेचने का दावा

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने करीब एक महीने के दौरान अलग-अलग गरबा आयोजनों के 686 फर्जी पास बेचे और इससे लगभग ₹8 लाख जुटाए। डीसीपी के बयान में आयोजनों के नाम के साथ पासों की संख्या भी बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर बेचे गए पासों में मंडपम के 167, ऑफबीट के 67, अनंत एक्सपीरियंस के 6, आफ्टर 59 के 118, पंचम के 12, रंगमोरलो के 49, वन रात्रि के 51, रातरड़ी के 31, सफेद परिंदे के 6, इनर सर्किल के 20 और एम्स रात्रि के 31 पास शामिल हैं। पुलिस की ओर से बताई गई इन श्रेणियों का कुल योग 558 होता है, जो 686 के कुल आंकड़े से मेल नहीं खाता। इसलिए आयोजनों के अनुसार अंतिम आंकड़ों की पुष्टि जांच के दौरान जरूरी होगी।

पहले भी कथित धोखाधड़ी का आरोप

डीसीपी लविना सिन्हा के मुताबिक, मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह ने इससे पहले अगस्त में ‘पिंक बटरफ्लाई’ नामक गरबा आयोजन में काम किया था। पुलिस के बयान के अनुसार, वहां इवेंट मैनेजमेंट के काम के दौरान पास से जुड़ी करीब ₹35,000 की कथित धोखाधड़ी हुई थी। इसके बाद उसे काम से हटा दिया गया था।

पुलिस का दावा है कि इसके बाद आरोपी को इसी तरह फर्जी पास बनाकर पैसे कमाने का विचार आया। डीसीपी ने यह भी कहा कि आरोपी पहले कथित तौर पर एक से दो लाख रुपये तक कमा चुका था और इस संबंध में पहले भी शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद उसने कथित गतिविधि जारी रखी और अधिक पास तैयार किए।

अलग-अलग जगहों पर शिकायतें, बैंक खातों की जांच जारी

डीसीपी के अनुसार, इस मामले से संबंधित शिकायतें अहमदाबाद के अलावा अन्य स्थानों पर भी सामने आई हैं। संतज पुलिस स्टेशन में भी गरबा पास से जुड़ी शिकायत दर्ज हुई थी। साइबर क्राइम ब्रांच राष्ट्रीय साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से मिली शिकायतों की भी जांच कर रही है।

पुलिस ने एक आरोपी से जुड़े HDFC बैंक खाते में भुगतान जमा होने की जानकारी हासिल की है। अब यह जांच की जा रही है कि रकम किन अन्य खातों में भेजी गई या कहां से निकाली गई। दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के रूप में किए जाने की आशंका की भी जांच हो रही है।पुलिस के मुताबिक, शिकायत दर्ज होने और एक बैंक खाते के फ्रीज होने के बाद दोनों आरोपी कथित तौर पर जोधपुर छोड़कर सीकर की ओर चले गए थे। तकनीकी विश्लेषण और अन्य जांच के आधार पर साइबर क्राइम टीम ने दोनों को राजस्थान से गिरफ्तार किया।

पुलिस की अपील: आधिकारिक माध्यम से ही खरीदें पास

पुलिस ने अपील की है गरबा पास खरीदने से पहले आयोजकों की आधिकारिक वेबसाइट और प्रमाणित संपर्क माध्यमों से उसकी पुष्टि करें। बाजार भाव से काफी कम कीमत पर पास देने के दावों से सावधान रहें और भुगतान करने से पहले टिकट की प्रामाणिकता जांचें।यदि किसी व्यक्ति को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का संदेह हो, तो वह राष्ट्रीय साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क कर सकता है या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करा सकता है। मामले में डिजिटल साक्ष्यों, सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल, व्हाट्सऐप चैट और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।

Dhruv Sanchania
ध्रुव संचानियाauthor

ध्रुव संचानिया गुजरात में टाइम्स नेटवर्क के सीनियर जर्नलिस्ट और ब्यूरो चीफ के पद पर कार्यरत हैं। ध्रुव ने प्रिंट, रेडियो, डिजिटल और टीवी पर शानदार काम किया है। क्राइम, इन्वेस्टिगेशन से लेकर इंसानी कहानियों तक में उनका काम गहराई से भरा होता है। जब वह हेडलाइन के पीछे नहीं भाग रहे होते तो वह सड़कों, सिनेमा और अगली छिपी हुई कहानी के पीछे भाग रहे होते हैं। उनका काम ऐसा है जो उन्हें अलग ला खड़ा करता है।

और पढ़ें
End of Article