मध्य प्रदेश में 10 तेंदुओं की खाल की बरामदगी के मामले में दिल्ली स्थित एक एनजीओ और कथित शिकारियों के नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच तेज हो गई है। मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने एनजीओ से जुड़े दो लोगों को कथित वन्यजीव शिकार मामले में गिरफ्तार किया है। एसटीएसएफ के अधिकारियों का दावा है कि उन्हें मामले से जुड़े पर्याप्त डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कथित तौर पर अवैध शिकार कराकर बाद में बरामदगी की कार्रवाई को इस तरह अंजाम दिया गया, जिससे एनजीओ और उसके पदाधिकारियों की एंटी-पोचिंग गतिविधियों का रिकॉर्ड मजबूत दिखाया जा सके। हालांकि, Wildlife SOS ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगा।
तेंदुओं की खाल बरामदगी मामले में कार्रवाई।
क्या है मामला?
बता दें कि ये मामला 23 जुलाई का है, जब ग्वालियर-आगरा हाईवे पर चार कथित शिकारियों को 10 तेंदुओं की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय Wildlife SOS ने अपनी 'फॉरेस्ट वॉच' एंटी-पोचिंग इकाई की कई महीनों की निगरानी के बाद इस कार्रवाई में मदद करने का दावा किया था।
एसटीएसएफ की जांच में खुलासा
हालांकि, खाल मध्य प्रदेश के जंगलों से आने की आशंका के चलते एसटीएसएफ ने भी इसकी समानांतर जांच शुरू कर दी थी। जांच के क्रम में भगवान सिंह उर्फ सलीम और उसके सहयोगी वसीम तक टीम पहुंची। अधिकारियों के अनुसार, भगवान सिंह लंबे समय से वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े मामलों में संदिग्ध रहा है और वह कम से कम पांच वर्षों से Wildlife SOS से जुड़ा हुआ था। वसीम के भी संगठन से जुड़े होने की बात सामने आई है।
STSF ने भगवान सिंह को 11 अगस्त और वसीम को 13 अगस्त को हिरासत में लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों ने Wildlife SOS के CEO कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिया। इसके बाद सत्यनारायण को शिवपुरी में जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया।
जांच में ‘स्टेज्ड सीजर’ के आरोप, CEO तक पहुंची जांच
जांच अधिकारियों के अनुसार, उन्हें ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनकी अब विस्तृत जांच की जा रही है। एजेंसियों को संदेह है कि कुछ मामलों में कथित तौर पर शिकार की घटनाओं और बाद की बरामदगी को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया हो सकता है। ऐसे में अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि क्या बरामदगी का श्रेय लेकर NGO और उसके पदाधिकारियों की एंटी-पोचिंग प्रोफाइल मजबूत करने का प्रयास किया गया।
पुराने मामलों की भी जांच, सत्यमंगलम कनेक्शन की पड़ताल
जांच में भगवान सिंह के पुराने मामलों की भी पड़ताल की जा रही है। वह पहले दिल्ली पुलिस में अधिकारी रह चुका है, लेकिन बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। जांच एजेंसियां वर्ष 2023 में तमिलनाडु के सत्यमंगलम वन क्षेत्र में हुई एक अन्य वन्यजीव बरामदगी के रिकॉर्ड की भी समीक्षा कर रही हैं। उस मामले में बाघ की खाल, तेंदुए की खाल और बाघ का कंकाल बरामद हुआ था। जांच में भगवान सिंह और वसीम की मौजूदगी की बात भी सामने आई है। उस समय Wildlife SOS ने कार्रवाई में अपनी भूमिका बताई थी। अब एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है या नहीं।
Wildlife SOS ने आरोपों से किया इनकार
कार्तिक सत्यनारायण ने Wildlife SOS की ओर से जारी बयान में आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि संगठन के साथ बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और अन्य लोग भी जुड़े हैं, जो वन्यजीव अपराध और संरक्षण से संबंधित सूचनाएं तथा अन्य मदद उपलब्ध कराते हैं। संगठन ऐसे लोगों को 'फॉरेस्ट फ्रेंड्स' कहता है। संगठन ने कहा कि वह हर वैध जांच और कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगा।
1995 में हुई थी Wildlife SOS की स्थापना
बता दें कि Wildlife SOS की स्थापना 1995 में कार्तिक सत्यनारायण और गीता शेषमणि ने की थी। संगठन ने आगरा में भालू बचाव केंद्र से काम शुरू किया था और बाद में मथुरा में हाथियों के लिए केंद्र सहित देश के कई हिस्सों में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया।
