Zepto Success Story: स्टार्टअप के जुनून में अधूरी छोड़ी पढ़ाई, हिट हो गया 10 मिनट वाला आइडिया; ऐसी है जेप्टो की सक्सेस स्टोरी

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई छोड़कर आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा ने 'जेप्टो' की शुरुआत की। 10-मिनट ग्रॉसरी डिलीवरी के अनोखे 'डार्क स्टोर' मॉडल ने इसे भारत के सबसे तेजी से उभरते यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स में शामिल कर दिया है।

आज के डिजिटल दौर में भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में कई ऐसी कहानियां देखने को मिलती हैं जो किसी को भी हैरान कर दें। इन्हीं में से एक सबसे चर्चित और प्रेरणादायक कहानी है क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'जेप्टो' (Zepto) की। दो युवा दोस्तों, आदित पालिचा (Adit Palicha) और कैवल्य वोहरा (Kaivalya Vohra), ने मिलकर इस 10-मिनट डिलीवरी वाले अनोखे बिजनेस मॉडल की शुरुआत की थी। दोनों संस्थापकों ने दुनिया की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) की कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी (Drop Out) और भारत लौटकर स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखने का बड़ा जोखिम लिया। उनका यह कदम उन लोगों के लिए एक मिसाल बन गया जो अपनी पढ़ाई या नौकरी के साथ समझौता करने से डरते हैं। जुनून, सही समय पर सही निर्णय और ग्राहकों की जरूरत को गहराई से समझने की क्षमता ने इस 10-मिनट वाले डिलीवरी आइडिया को रातों-रात भारतीय बाजार में हिट बना दिया।

Zepto Success Story

जेप्टो की सक्सेस स्टोरी

कैसे हुई शुरुआत?

जेप्टो की शुरुआत की कहानी कोरोना महामारी और लॉकडाउन के समय से जुड़ी हुई है। जब पूरा देश बंद था, तब मुंबई में रहने वाले आदित और कैवल्य ने महसूस किया कि ग्रॉसरी (किराने के सामान) की डिलीवरी मिलना कितना मुश्किल काम हो गया था। अधिकांश मौजूदा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म डिलीवरी के लिए एक या दो दिन का समय ले रहे थे। इसी समस्या का हल खोजने के लिए दोनों दोस्तों ने सबसे पहले 'किरानाकार्ट' (Kiranakart) नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया, जो स्थानीय दुकानों से सामान डिलीवर करता था। हालांकि, जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि इस मॉडल में गुणवत्ता और डिलीवरी टाइम को कंट्रोल करना कठिन था। इस अनुभव से सीख लेते हुए उन्होंने एक नया मॉडल तैयार किया और 'जेप्टो' का जन्म हुआ। जेप्टो का नाम भौतिकी के शब्द 'जेप्टोसेकंड' (Zeptosecond) से लिया गया है, जो समय की बहुत ही छोटी इकाई को दर्शाता है, यानी इसका मकसद बेहद तेज गति से सेवाएं प्रदान करना था।

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