World No Tobacco Day 2023, Cigarette Buds:धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ! ये स्लोगन बहुत लोकप्रिय है। जो लोगों से सिगरेट छोड़ने की अपील करता है। पर क्या सिगरेट के बचे फिल्टर से कुछ बन सकता है। आप में ज्यादातर लोग सिगरेट पीने के बाद बचे बट को जमीन पर या फिर डस्टबिन में फेंक देते होंगे। पर आपको ये नहीं पता होगा कि उस 5 सेंटीमीटर की सिगरेट बट में 50 से ज्यादा ऐसे केमिकल होते हैं, जो मिट्टी को बर्बाद कर सकते हैं। इतने से टुकड़े को अपने-आप खत्म होने में 12 साल लग जाते हैं।
सिगरेट बट्स से बना रहे खिलौने
इसी को देखते हुए नमन गुप्ता ने अपने बड़े भाई विपुल गुप्ता से संपर्क किया, जो एक इंजीनियर थे, जिन्होंने सिगरेट बट्स के निपटान के लिए पर्यावरण के अनुकूल समाधान खोजा, 2018 में दोनों भाइयों ने सिगरेट बट्स को अप-साइकिल करने के लिए कोड एफर्ट नाम की एक प्राइवेट कंपनी शुरू की।
चादर से लेकर खिलौने तक होते हैं तैयार
सिगरेट के बट्स
- तम्बाकू से, जो एक प्राकृतिक कीटनाशक है, कोड एफर्ट कम्पोस्ट पाउडर बनाता है और इसे आस-पास के बागानों और नर्सरी में दान कर देते हैं।
- दूसरे घटक उसमें मौजूद कागज को लुगदी में बदलकर चादरों में तैयार करते हैं। कोड एफर्ट पेपर से मॉस्किटो रिपेलेंट (मच्छर भगाने की दवा) भी बनाया जाता है।
- तीसरा घटक फाइबर है, जिसे वैज्ञानिक रूप से सेलूलोज़ एसीटेट कहा जाता है, जिसे पहले संसाधित किया जाता है। फाइबर के रिसाइकलिंग के बाद, यह प्रयोगशाला परीक्षण से गुजरता है। इसके बाद, उसी फाइबर का उपयोग कुशन, तकिए, गद्दे, मुलायम खिलौने, कीचेन, कलाकृतियों और बहुत कुछ भरने में किया जाता है।
हर इतनी सिगरेट होती है खपत
भारत में हर साल लगभग 100 बिलियन (10,000 करोड़) सिगरेट की खपत होती है, जिससे 26,454 टन कचरा पैदा होता है। रायटर के मुताबिक गुप्ता बाहरी आपूर्तिकर्ताओं को सिगरेट के कचरे के लिए न्यूनतम 500 रुपये से अधिकतम 800 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान करते हैं।
