त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है। गुरुवार को बाजार में हल्की रिकवरी जरूर देखने को मिली, जिसके बाद एमसीएक्स पर सोना 1,47,268 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, चांदी की चमक भी फीकी पड़ी है और इसके दाम लुढ़ककर 2,09,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं।
दीवाली और धनतेरस से ठीक पहले आई इस गिरावट ने खरीदारों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या त्योहार आने तक कीमती धातुएं और सस्ती हो सकती हैं? कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके पीछे अमेरिकी ब्याज दरों का रुख, कच्चे तेल की कीमतें, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक घटनाक्रम जैसे कई अहम फैक्टर हैं। इन कारकों में होने वाले बदलाव आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।
दिवाली तक सोना-चांदी और कितना सस्ता होगा?
बाजार विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक, दिवाली तक सोने और चांदी की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, कीमतों में गिरावट कितनी होगी, यह वैश्विक बाजार के संकेतों और निवेशकों के रुझान पर निर्भर करेगा। सोने का भाव टूटर 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। वहीं, चांदी की कीमत गिरकर 1.90 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ सकती है।
क्यों कीमत में आ सकती है गिरावट?
सेबी-रजिस्टर्ड बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता के मुताबिक, बढ़ती ब्याज दरों की आशंका, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे कारक सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव डाल रहे हैं। सोना और चांदी ऐसे निवेश विकल्प हैं, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो ये निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले आकर्षक विकल्प बन जाते हैं। इससे कीमती धातुओं की मांग और कीमतों पर दबाव पड़ता है।
महंगा क्रूड बढ़ा सकता है सोने-चांदी की मुश्किलें
केडिया एडवाइजरी के संस्थापक एवं निदेशक, अजय केडिया ने बातया कि अमेरिका और रूस के बीच कूटनीतिक सुलह के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं दिख रही है। महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और इससे ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की आशंका मजबूत हो सकती है।
अगर महंगाई बढ़ती है तो आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेंगे। मेरा अनुमान है कि दिसंबर की मॉनिटरी पॉलिसी में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है। जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, सोना दबाव में आ जाता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर वैश्विक मांग, डॉलर और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की जरूरत जैसे दूसरे फैक्टर्स पर भी निर्भर करेगा।
सोने के लिए 1.40 लाख का लेवल अहम
सोने की कीमतों को लेकर बाजार में 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसा इसलिए कि जून 2026
में सोने का भाव इसी स्तर पर था। तब वहां से तेजी आई थी। इसलिए अगर गिरावट आती है तो पहला सपोर्ट यहीं होगा। वहीं, तेजी की स्थिति में 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर है।
चांदी में 2 लाख रुपये के लेवल पर नजर
चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। चांदी टूटकर 1.90 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ सकती है। ऐसा इसलिए कि 23 मार्च 2026 को चांदी की कीमत गिरकर 199,600 रुपये प्रति किलोग्राम आ गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 54 डॉलर प्रति औंस के आसपास का निचला स्तर और 60 डॉलर का ऊपरी स्तर भी चर्चा में है। चांदी पर सोने के मुकाबले औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, मैन्युफैक्चरिंग और निवेश की मांग में बदलाव इसकी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या और सस्ता होगा सोना और चांदी?
क्या निवेश करने के लिए माकूल समय?
अगर आप दिवाली पर आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इंतजार करना बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर सोने और चांदी में निवेश करना चाहते हैं तो यह सही मौका है। आप इस गिरावट का फायदा उठाकर कुछ निवेश कर सकते हैं। ऐसा इसलिए कि दिवाली तक सोना-चांदी सस्ता होगा या महंगा, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है। फिलहाल बाजार में गिरावट के संकेत जरूर हैं, लेकिन आगे की दिशा वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी।
दिवाली पर सोना खरीदने वालों के लिए 3 टिप्स
- खरीदारी का सही समय होगा: अगर आप ज्वेलरी या कॉइंस खरीदना चाहते हैं, तो दिवाली का समय आपके लिए राहत भरा हो सकता है। सोने का ₹1.40 लाख और चांदी का ₹2.00 लाख तक आना खरीदारों के लिए एंट्री का अच्छा मौका साबित होगा।
- किश्तों में करें खरीदारी: एक्सपर्ट्स की सलाह है कि एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा सोना-चांदी खरीदें।
- वैश्विक आंकड़ों पर रखें नजर: अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की चाल और बॉन्ड यील्ड आगे सोने की असली दिशा तय करेंगे।
