कई बार लोग एक ही बैंक में एक से ज्यादा एफडी खुलवा लेते हैं। एक से ज्यादा एफडी होने पर सभी एफडी की एक ही मैच्योरिटी डेट रखने के बजाय अलग-अलग रखा जाना फायदेमंद हो सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर पूरा पैसा एक साथ निकालने के बजाय अलग-अलग समय पर मिलने वाली FD का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे FD Laddering की रणनीति कहा जाता है।
अलग-अलग एफडी की मैच्योरिटी डेट अलग-अलग क्यों होनी चाहिए (AI Generated Image)
पैसे की जरूरत होने पर नहीं तोड़नी पड़ेगी FD
मान लीजिए आपने एक ही बैंक में 1 लाख रुपये की तीन FD करवाई हैं और तीनों की मैच्योरिटी एक ही दिन है। अगर कुछ समय बाद आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो मैच्योरिटी से पहले FD तोड़ने की जरूरत पड़ सकती है। इसके बजाय, अगर तीनों FD की मैच्योरिटी अलग-अलग है, तो जरूरत के समय नजदीक आने वाली FD का पैसा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बाकी रकम अपनी तय अवधि तक निवेशित रह सकती है।
नियमित अंतराल पर उपलब्ध रहेगा आपका पैसा
अलग-अलग मैच्योरिटी डेट रखने से आपके पास समय-समय पर पैसा उपलब्ध हो सकता है। उदाहरण के लिए, तीन FD को एक, दो और तीन साल की अवधि में रखा जाए, तो हर साल एक FD मैच्योर हो सकती है। इससे बड़े खर्च, घर की जरूरत, शिक्षा, ट्रैवल या दूसरी फाइनेंशियल जरूरत के लिए रकम की व्यवस्था करने में आसानी हो सकती है।
ब्याज दर बदलने पर भी मिल सकता है फायदा
FD की ब्याज दरें समय के साथ बदल सकती हैं। अगर आपकी सभी FD एक ही समय पर मैच्योर होती हैं और उस समय बैंक की FD दरें कम हैं, तो पूरी रकम को कम ब्याज दर पर दोबारा जमा करना पड़ सकता है। अलग-अलग समय पर FD मैच्योर होने पर आपको अलग-अलग समय की ब्याज दरों पर निवेश करने का मौका मिल सकता है। हालांकि, भविष्य की ब्याज दरों की गारंटी नहीं होती।
पूरी रकम एक साथ रिन्यू करने का दबाव कम
सभी FD एक ही तारीख पर मैच्योर होने पर एक साथ बड़ी रकम के लिए निवेश का फैसला लेना पड़ सकता है। अलग-अलग मैच्योरिटी होने पर रकम चरणों में उपलब्ध होती है। इससे आप अपनी जरूरत और उस समय उपलब्ध निवेश विकल्पों को देखकर फैसला कर सकते हैं।
FD Laddering से बन सकता है बेहतर कैश फ्लो
अगर आपकी FD की मैच्योरिटी अलग-अलग महीनों या वर्षों में है, तो यह एक तरह का व्यवस्थित कैश फ्लो बना सकती है। खासकर वे लोग जिन्हें समय-समय पर सुरक्षित निवेश से रकम की जरूरत होती है उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, FD करवाते समय ब्याज दर, अवधि, टैक्स और समय से पहले निकासी के नियम जरूर जांचने चाहिए। अलग-अलग मैच्योरिटी रखना कोई अनिवार्य नियम नहीं है, बल्कि पैसों की जरूरत और वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से अपनाई जाने वाली रणनीति है।
