एक ही बैंक में हैं कई FD? जानिए अलग-अलग मैच्योरिटी डेट रखने का सबसे बड़ा फायदा

एक ही बैंक में अलग-अलग एफडी हों तो सभी एफडी की मैच्योरिटी डेट अलग-अलग रखने की सलाह क्यों दी जाती है। हर एफडी की मैच्योरिटी डेट अलग रखने का क्या फायदा होता है।

कई बार लोग एक ही बैंक में एक से ज्यादा एफडी खुलवा लेते हैं। एक से ज्यादा एफडी होने पर सभी एफडी की एक ही मैच्योरिटी डेट रखने के बजाय अलग-अलग रखा जाना फायदेमंद हो सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर पूरा पैसा एक साथ निकालने के बजाय अलग-अलग समय पर मिलने वाली FD का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे FD Laddering की रणनीति कहा जाता है।

FD Laddering

अलग-अलग एफडी की मैच्योरिटी डेट अलग-अलग क्यों होनी चाहिए (AI Generated Image)

पैसे की जरूरत होने पर नहीं तोड़नी पड़ेगी FD

मान लीजिए आपने एक ही बैंक में 1 लाख रुपये की तीन FD करवाई हैं और तीनों की मैच्योरिटी एक ही दिन है। अगर कुछ समय बाद आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो मैच्योरिटी से पहले FD तोड़ने की जरूरत पड़ सकती है। इसके बजाय, अगर तीनों FD की मैच्योरिटी अलग-अलग है, तो जरूरत के समय नजदीक आने वाली FD का पैसा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बाकी रकम अपनी तय अवधि तक निवेशित रह सकती है।

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