मकान मालिक के साथ क्या रिश्ता है? इन शहरों के लोगों को देनी होगी जानकारी

इनकम टैक्स फाइल करने वालों को अब रेंट पर छूट के लिए मकान मालिक के साथ रिश्ता बताना होगा। यह बदलाव नए इनकम टैक्स ऐक्ट 2025 का हिस्सा है, जो इस साल 1 अप्रैल से प्रभावी होगा।

अक्सर देखा गया है कि कई कर्मचारी टैक्स बचाने के लिए अपने माता-पिता, पत्नी या किसी करीबी रिश्तेदार के नाम पर फर्जी रेंट रिसीट (किराया रसीद) जमा कर देते हैं। हालांकि कानूनन अपने माता-पिता को किराया देना गलत नहीं है, बशर्ते वे उस आय पर टैक्स भरें और वास्तविक लेनदेन हुआ हो। लेकिन अब नए नियमों के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि क्या किरायेदार और मकान मालिक के बीच वाकई में 'किरायेदार-मालिक' का व्यावसायिक रिश्ता है या यह सिर्फ टैक्स बचाने का एक जुगाड़ है।

HRA Exemption

क्या है फॉर्म 124 और क्यों है जरूरी?

आयकर विभाग ने एक नया फॉर्म 124 पेश किया है, जिसे अब टैक्स छूट का दावा करते समय जमा करना होगा। इस फॉर्म में आपको न केवल मकान मालिक का पैन (PAN) नंबर देना होगा, बल्कि यह भी बताना होगा कि वह आपका रिश्तेदार है या नहीं। यदि मकान मालिक आपका कोई सगा संबंधी है, तो विभाग उस लेनदेन की गहराई से जांच कर सकता है। विभाग यह देखना चाहता है कि क्या किराया बाजार दर (Market Rate) के हिसाब से दिया जा रहा है और क्या मकान मालिक उस किराए को अपनी 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) में दिखा रहा है।

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