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क्या है खाने के तेल का 'One Nation, One Packet' नियम? समझिए इस बदलाव से कैसे होगा आपका फायदा

सरकार ने 'लीगल मेट्रोलॉजी' (कानूनी माप-तौल) नियमों के तहत खाने के तेल के लिए स्टैंडर्ड पैक साइज तय किए हैं, जिससे बाजार में पारदर्शिता आएगी।

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खाने का तेल
Authored by: Alok Kumar
Updated Jun 7, 2026, 13:30 IST
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केंद्र सरकार ने खाद्य तेल (Cooking oil) के लिए 'One Nation, One Packet' लागू करने का ऐलान किया है। सरकार के नए आदेश के मुताबिक, अब भारत में खाना पकाने का तेल सिर्फ तय साइज के पैकेट में ही बेचा जाएगा। इसका मकसद ग्राहकों के लिए अलग-अलग ब्रांड की कीमतों की तुलना करना आसान बनाना है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने शनिवार, 6 जून को खाने वाले तेलों के लिए स्टैंडर्ड पैकेट साइज़ तय किए और मैन्युफैक्चरर्स, पैकर्स और इम्पोर्टर्स को नए नियमों को लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया है। आखिर, सरकार ने ऐसा क्यों किया? इस बदलाव से क्या तेल की बढ़ती कीमत पर लगाम लगेगी? ग्राहाकों को कैसे होगा फायदा? आइए आपके सभी सवाल के जवाब देते हैं।

कंपनियों का खेल होगा खत्म

यह नया नियम कंपनियों के उस पुराने खेल को रोकने के लिए है, जहां वे अजीब और उल्टे-सीधे साइज के पैकेट बनाकर तेल बेचती थीं। इसके चक्कर में लोग समझ ही नहीं पाते थे कि कौन सा ब्रांड सस्ता दे रहा है और कौन सा महंगा। अब सरकार की इस सख्ती से लोग आसानी से सही दाम और ब्रांड चुन सकेंगे।

अब सिर्फ 9 साइज में मिलेगा खाने का तेल

सरकार की नई नीति (SOP) के मुताबिक, अब पाम ऑयल, सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी, मूंगफली, राइस ब्रान, तिल, कॉटन सीड और मक्के के तेल जैसी सभी मुख्य कैटगरी सिर्फ तय किए गए साइज में ही बेची जा सकेंगी।

  • 200 मिली/ग्राम
  • 500 मिली/ग्राम
  • 1 लीटर/किग्रा
  • 2 लीटर/किग्रा
  • 3 लीटर/किग्रा
  • 4 लीटर/किग्रा
  • 5 लीटर/किग्रा
  • 15 लीटर/किग्रा
  • 20 लीटर/किग्रा

इसका फायदा क्या है?

कंपनियां अब 910 मिली या 4.2 लीटर जैसे अजीब साइज बनाकर ग्राहकों को भ्रमित नहीं कर पाएंगी। अब आप दुकान पर खड़े होकर आसानी से देख सकेंगे कि कौन सा ब्रांड आपको सही कीमत पर तेल दे रहा है।

लीटर के साथ वजन लिखना जरूरी होगा

अक्सर कंपनियां लीटर और किलोग्राम के फेरबदल में ग्राहकों को चूना लगाती थीं। अब नियम कड़ा कर दिया गया है। अगर पैकेट पर मात्रा लीटर या मिलीलीटर में लिखी है, तो उसके साथ उसका सटीक वजन (ग्राम या किलोग्राम) भी साफ-साफ लिखना होगा। इससे कंपनियों की हेराफेरी पूरी तरह बंद हो जाएगी।

कंपनियों को दी गई 3 महीने की मोहलत

सरकार ने तेल बनाने वाली, पैक करने वाली और विदेशों से तेल मंगाने वाली कंपनियों को इन नए नियमों को पूरी तरह लागू करने के लिए 3 महीने का समय दिया है। हालांकि, जो कंपनियां चाहें, वे इसे आज से ही शुरू कर सकती हैं। यह नियम देश में बनने वाले और बाहर से आने वाले (आयातित) दोनों तरह के तेलों पर लागू होगा।

छोटे पैकेट पर छूट

जो लोग रोज कमाते हैं और रोज खरीदकर खाते हैं, उनके लिए 200ml या 200 ग्राम से छोटे पाउच (जैसे ₹5 या ₹10 वाले छोटे पैकेट) पहले की तरह बाजार में मिलते रहेंगे। उन पर यह पाबंदी नहीं है। साथ ही जो तेल बहुत कम बिकते हैं, उन्हें भी इस नियम से अलग रखा गया है।

आम ग्राहकों को इससे कैसे फायदा होगा?

बाजार में एक जैसी पैकेजिंग आने से कंपनियों के बीच 'सही दाम' देने की होड़ मचेगी। मिलावट और नाप-तौल की गड़बड़ी पकड़ना आसान हो जाएगा और पारदर्शिता बढ़ने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा कि उन्हें उनके पैसे की पूरी कीमत मिल रही है।

तेल पैकेजिंग नियम

तेल पैकेजिंग नियम

90% कंपनियों से बातचीत के बाद फैसला

सरकार ने यह फैसला देश की 90% तेल कंपनियों से बाततचीत के बाद लिया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को साफ किया कि देश के खाने के तेल बाजार का 90 फीसदी हिस्सा संभालने वाले बड़े संगठनों (एसोसिएशन्स) के साथ लंबी बातचीत के बाद यह कदम उठाया गया है।

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