आज के समय में बढ़ते खर्चों के बीच पैसे बचाना आसान नहीं है। महीने की शुरुआत में सैलरी आते ही किराया, राशन, बिजली का बिल और दूसरी जरूरतों पर पैसा खर्च होने लगता है। इसके अलावा, ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाना खाने और बिना जरूरत की चीजें खरीदने में भी काफी पैसे निकल जाते हैं। ऐसे में अगर आप अपनी बचत बढ़ाना चाहते हैं तो नो-स्पेंड डे (No Spend Day) का तरीका अपना सकते हैं। नो-स्पेंड डे की मदद से बिना कमाई बढ़ाए भी खर्चों पर लगाम लगाई जा सकती है।
No Spend Day क्या है (Photo: iStock)
क्या होता है नो-स्पेंड डे?
नो-स्पेंड डे एक ऐसी आदत है, जिसमें आप दिनभर गैर-जरूरी चीजों पर पैसे खर्च नहीं करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप खाना, दवा या दूसरी जरूरी चीजों पर खर्च करना बंद कर दें। इस तरीके का इस्तेमाल कर उन खर्चों को रोका जा सकता है, जिन्हें टाला जा सकता है।
उदाहरण के लिए ऑनलाइन शॉपिंग करना, बिना जरूरत कपड़े खरीदना या फूड डिलीवरी ऐप से खाना ऑर्डर करना। ये सभी ऐसे खर्च हैं, जिनसे नो-स्पेंड डे पर बचा जा सकता है। इस दिन आप घर पर मौजूद चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
महीने में 4 दिन अपनाएं यह तरीका
नो-स्पेंड डे शुरू करने के लिए आपको अपनी पूरी लाइफस्टाइल बदलने की जरूरत नहीं है। आप महीने में सिर्फ 4 दिन इसके लिए तय कर सकते हैं। उदाहरण के लिए हर रविवार या महीने की 5, 12, 19 और 26 तारीख को नो-स्पेंड डे रख सकते हैं।
इन दिनों ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स से दूरी बनाएं, बाहर खाने के बजाय घर का खाना खाएं और मनोरंजन के लिए मुफ्त विकल्पों का इस्तेमाल करें। हालांकि, अचानक कोई जरूरी खर्च आ जाए, तो उसे टालने के बजाय प्राथमिकता दें।
नो-स्पेंड डे से कैसे बढ़ेगी बचत?
मान लीजिए कि आप एक दिन में औसतन 200 रुपये गैर-जरूरी चीजों पर खर्च करते हैं। अगर महीने में 4 दिन इस खर्च से बच जाते हैं तो आपकी बचत 800 रुपये हो सकती है। इस तरह एक साल में 9,600 रुपये बचाए जा सकते हैं।
हालांकि, यह केवल एक उदाहरण है। वास्तविक बचत आपकी खर्च करने की आदतों पर निर्भर करेगी। आप चाहें तो इन पैसों को अलग बचत खाते में जमा कर सकते हैं या अपने इमरजेंसी फंड में जोड़ सकते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
नो-स्पेंड डे को सजा की तरह नहीं, बल्कि पैसे मैनेज करने की एक अच्छी आदत की तरह अपनाएं। शुरुआत में महीने में 4 दिन तय करें और हर दिन के खर्च का हिसाब रखें। इससे आपको पता चलेगा कि आपका पैसा कहां खर्च हो रहा है और किन आदतों में बदलाव की जरूरत है। धीरे-धीरे यह छोटी-सी कोशिश आपके बजट को बेहतर बनाने और बचत बढ़ाने में मदद कर सकती है।
