Market Expert on STT LTCG and FII : पिछले 2 साल से शेयर बाजार का हाल बेहाल है। विदेशी निवेशक लाखों करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं। भारत फिलहाल दुनिया के सबसे ज्यादा अंडरपरफॉर्मिंग मार्केट में शामिल हो गया है। बेंचमार्क से लेकर ब्लूचिप तक शेयर पिट रहे हैं।
बाजार के कमजोर प्रदर्शन पर बोले एक्सपर्ट
जब शेयर बाजार के निराशाजनक प्रदर्शन की वजहें खोजी जाती हैं, तो ज्यादातर एक्सपर्ट अब यह मानने लगे हैं कि बाजार की बदहाली के पीछे सिर्फ बाहरी कारण ही नहीं हैं। बल्कि, कुछ नीतिगत और टैक्स से जुड़े फैसले भी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच दिग्गज निवेशकों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। बहस सिर्फ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली तक सीमित नहीं है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG), नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRI) के लिए निवेश की जटिल प्रक्रियाएं और घरेलू निवेश के जरिए विदेशी पूंजी को आसानी से निकलने का रास्ता मिलने जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। शंकर शर्मा, आशीष कचोलिया और आकाश प्रकाश की टिप्पणियां इस बहस के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं।
विदेशी निवेशकों ने क्यों घटाई भारत में दिलचस्पी?
Amansa Capital के आकाश प्रकाश ने अपने लेख ‘Risk of Irrelevance’ में विदेशी निवेशकों के बदलते रुख पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक, सितंबर 2024 में भारतीय बाजार के शिखर के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयरों से करीब 65 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की है। इसी दौरान MSCI Emerging Markets Index में भारत की हिस्सेदारी लगभग 21% से घटकर 10% रह गई।
प्रकाश के अनुसार, भारतीय शेयरों ने डॉलर के लिहाज से उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। निवेशकों के लिए चिंता केवल गिरावट नहीं, बल्कि भारत को समर्पित निवेश आवंटन की जरूरत पर उठते सवाल भी हैं।
उनके मुताबिक, कैपिटल गेन टैक्स, कारोबार और अनुपालन से जुड़ी जटिलताएं, रुपये में गिरावट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को लेकर बनी धारणाएं विदेशी निवेशकों की गणना को प्रभावित कर रही हैं।
क्या है शंकर शर्मा की राय?
बाजार के अनुभवी निवेशक शंकर शर्मा ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए टैक्स नीति में बदलाव की वकालत की है। उनका कहना है कि विदेशी निवेशकों पर इक्विटी निवेश का टैक्स घटाकर बहुत कम या शून्य किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों पर टैक्स बढ़ाने की बात भी उन्होंने रखी है।
शर्मा का तर्क है कि भारत को अपना चालू खाता घाटा पूरा करने और विदेशी मुद्रा की जरूरतों के लिए डॉलर पूंजी चाहिए। 23 अक्टूबर की उनकी टिप्पणी में भी घरेलू म्यूचुअल फंड के सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को लेकर सवाल उठाए गए। उनका मानना है कि SIP के जरिए आने वाला घरेलू पैसा विदेशी निवेशकों को बाजार से निकलने के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी उपलब्ध कराता है। उन्होंने रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिरता को शेयर बाजार के प्रदर्शन से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया है।
आशीष कचोलिया ने बताई NRI निवेश की मुश्किल
दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया ने NRI निवेश को आसान बनाने की मांग की है। उन्होंने NRI निवेश से जुड़े KYC, टैक्स प्रक्रिया और राउंड-ट्रिपिंग रोकने के लिए लागू अनुपालन संबंधी बाधाओं को पूंजी प्रवाह के रास्ते में रुकावट बताया है। उनका सुझाव है कि भारत को हर साल 100 अरब डॉलर की NRI पूंजी आकर्षित करने का लक्ष्य तय करके अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटाना चाहिए।
वहीं, मार्केट एक्सपर्ट समीर अरोड़ा ने भी NRI निवेश पर फंड-स्तरीय सीमाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, शर्मा का इस मामले में एक अलग अनुभव रहा है। मई 2026 में उन्होंने कहा था कि NRI के तौर पर भारत में निवेश करना उनके लिए सहज रहा है और ब्रोकर तथा कस्टोडियन अधिकांश प्रक्रियाएं संभाल लेते हैं। इससे साफ है कि निवेश प्रक्रिया को लेकर विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है।
विदेशी पैसा लौटाने के लिए क्या करना होगा?
विदेशी पूंजी की वापसी के लिए केवल टैक्स में छूट देना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को NRI निवेश की KYC और निकासी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, टैक्स व्यवस्था में स्पष्टता रखने और विदेशी निवेशकों के अनुपालन संबंधी खर्च को कम करने पर विचार करना होगा। साथ ही, कंपनियों की कमाई, बाजार का वैल्यूएशन, रुपये की स्थिरता और आर्थिक विकास की संभावनाएं मजबूत करना भी जरूरी है।
आकाश प्रकाश ने मौजूदा निराशा को संभावित पलटाव का संकेत भी माना है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि भारत को वैश्विक निवेशकों की प्राथमिकता सूची में अपनी जगह बनाए रखनी होगी। विदेशी पैसा लौटने की असली परीक्षा यही होगी कि भारत निवेशकों को बेहतर रिटर्न के साथ भरोसेमंद और आसान निवेश व्यवस्था भी दे पाता है या नहीं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में शामिल विशेषज्ञों के विचार और विश्लेषण उनके निजी मत हैं। इन्हें निवेश सलाह या शेयरों की खरीद-बिक्री की सिफारिश न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
