Hormuz Strait में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा है। सोमवार, 31 अगस्त को Brent Crude की कीमत करीब 2.73% बढ़कर 90.51 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि West Texas Intermediate यानी WTI करीब % चढ़कर 85.41 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
फिर ब्रेंट क्रूड का दाम 90 डॉलर पार
तेल बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब होर्मुज में कई हफ्तों की अपेक्षाकृत शांति के बाद दोबारा सैन्य कार्रवाई हुई है। अमेरिका ने रविवार, 30 अगस्त को ईरान के लराक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरानी सेना इन लॉन्चरों के जरिये होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थी।
होर्मुज फिर तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता
दुनिया के तेल कारोबार के लिए होर्मुज बेहद अहम समुद्री रास्ता है। ऐसे में यहां सैन्य तनाव बढ़ने का मतलब सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष नहीं है, बल्कि वैश्विक तेल सप्लाई पर नई चिंता भी है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 8 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इस घटनाक्रम ने बाजार को यह संकेत दिया है कि इलाके में तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक और ट्रेडर्स तेल की कीमतों में जोखिम को फिर से शामिल कर रहे हैं।
एक महीने में ब्रेंड के दाम में 17 डॉलर का उतार-चढ़ाव
तेल बाजार के लिए अगस्त भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। पूरे महीने ब्रेंट फ्यूचर्स में करीब 17 डॉलर प्रति बैरल का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच किसी संभावित शांति समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ने के साथ ही बाजार में अनिश्चितता बढ़ती गई। अब होर्मुज में सैन्य गतिविधि दोबारा तेज होने से बाजार की सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं तेल की आवाजाही और ज्यादा प्रभावित न हो जाए। हालांकि, फिलहाल अमेरिकी और ईरानी हमले सीमित दायरे में रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य तनाव का असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है।
वेनेजुएला पर अमेरिका कदम
इसी बीच अमेरिका ने वेनेजुएला (Venezuela) के तेल भंडार को लेकर भी एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के 17 ऑयल फील्ड में मौजूद 65 अरब बैरल से ज्यादा रिजर्व पर मेजोरिटी कंट्रोल हासिल करने की दिशा में समझौता किया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक प्रस्तावित जॉइंट वेंचर में अमेरिका की करीब 55% हिस्सेदारी होगी और उसे ऑयल की खरीद कॉस्ट तय करने का अधिकार भी मिलेगा। यह तेल अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को फिर से भरने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
