Times Now Education Summit: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य प्रो. गौरव वल्लभ ने TimesNow.in एजुकेशन समिट 2026 में शिक्षा, बजट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल पेमेंट्स को लेकर कई अहम बातें साझा कीं। उन्होंने UPI पर 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर लगने वाले MDR शुल्क को लेकर स्पष्ट किया कि इसका अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बजट बढ़ाने से ज्यादा शिक्षकों की गुणवत्ता और छात्रों के लर्निंग आउटकम पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
Times Now Education Summit में गौरव वल्लभ
UPI पर 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर क्या कहा?
UPI MDR शुल्क को लेकर गौरव वल्लभ ने कहा कि UPI एक इंटरफेस और डिजिटल पेमेंट्स का इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसे भारत ने तैयार किया है। उनके अनुसार, ग्राहक किसी को कितना भी पैसा भेजे या खरीदारी करे, उस पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 2,000 रुपये से अधिक के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट को 0.4% MDR देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये है। गौरव वल्लभ के मुताबिक, यह शुल्क ग्राहक को नहीं, बल्कि मर्चेंट को देना है। उन्होंने डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और कैश हैंडलिंग की लागत का उदाहरण देते हुए UPI को मर्चेंट के लिए लागत के लिहाज से उपयोगी विकल्प बताया।
शिक्षा बजट से ज्यादा जरूरी क्वालिटी ऑफ एजुकेशन
शिक्षा बजट पर बात करते हुए गौरव वल्लभ ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में शिक्षा के लिए बजट आवंटन में लगभग 8.25% की बढ़ोतरी हुई है और केंद्र सरकार का आवंटन करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि उनका मुख्य सवाल बजट बढ़ने या घटने से ज्यादा यह है कि इसका छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ा। उनके अनुसार, केवल बजट बढ़ाने या बड़ी-बड़ी इमारतें बनाने से विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान तैयार नहीं होते।
उन्होंने शिक्षकों की गुणवत्ता, अकादमिक माहौल और सीखने के परिणामों को शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि अगर आठवीं कक्षा का बच्चा बुनियादी गुणा-भाग नहीं कर पाता, तो केवल बजट बढ़ने से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता।
AI के दौर में शिक्षकों को Unlearn और Relearn करना होगा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शिक्षा पर प्रभाव को लेकर गौरव वल्लभ ने कहा कि शिक्षकों को लगातार नई चीजें सीखने की जरूरत है। उनके मुताबिक, AI जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता विकसित कर रहा है, इसलिए यह जरूरी है कि शिक्षक और नई पीढ़ी इन बदलावों के लिए तैयार हों।
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उन्होंने Unlearn और Relearn यानी पुरानी जानकारी और तरीकों की समीक्षा करते हुए नई चीजें सीखने पर जोर दिया। उनका कहना था कि AI का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव तब होगा, जब वह उन लोगों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में मदद करे, जो इससे वंचित रहे हैं।
ग्लोबल रैंकिंग से ज्यादा जरूरी छात्रों का लर्निंग आउटकम
उच्च शिक्षा संस्थानों की ग्लोबल रैंकिंग पर गौरव वल्लभ ने कहा कि भारतीय संस्थानों में मजबूत अकादमिक क्षमता है। उन्होंने बताया कि रैंकिंग में सुधार के लिए रिसर्च पेपर और अन्य मानकों पर काम किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि रैंकिंग की दौड़ में क्लासरूम की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षक का असली मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि एक घंटे की पढ़ाई के बाद छात्र ने कितना सीखा और वह उस विषय को कितनी अच्छी तरह समझा सकता है।
