हवाई जहाज के कॉकपिट में पायलट अकेला क्यों नहीं होता? जानिए ‘Two Pilot Rule’ के पीछे की कहानी

फ्लाई दुबई (Flydubai) Flight FZ1073 की घटना के बाद कहीं न कहीं आपके दिमाग में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर हवाई जहाज के कॉकपिट में पायलट अकेला क्यों नहीं होता? ये Two Pilot Rule क्यों बनाया गया और इसके पीछे की कहानी क्या है।

फ्लाई दुबई (Flydubai) Flight FZ1073 में उड़ान के दौरान को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार (Captain Smit Machchhar) पर हमला कर उन्हें जख्मी कर दिया, लेकिन यह कैप्टन की समझदारी ही समझें कि एक बड़ा विमान हादसा घटने से टल गया। उन्होंने जख्मी होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा अंदर से खोला और स्थिति काबू में आ गई। इस घटना के बाद से ही स्मित मच्छार का नाम सुर्खियों में बना हुआ है। लेकिन इस घटना के बाद सवाल यही कि आखिर हवाई जहाज के कॉकपिट में पायलट अकेला क्यों नहीं होता? ये Two Pilot Rule क्यों बनाया गया और इसके पीछे की कहानी क्या है। आइए इस टू पायलेट रूल की कहानी को जानते हैं-

Two Pilot Rule

क्या है Two Pilot Rule की पूरी कहानी (AI Generated Image)

1999 और 2015 में घटे दो विमान हादसे

दरअसल, कॉकपिट में केवल एक ही व्यक्ति के कंट्रोल में जहाज को क्यों नहीं छोड़ा जाता इसका जवाब आपको 1999 और 2015 में घटे दो विमान हादसों के साथ मिल सकता है। EgyptAir Flight 990 और Germanwings Flight 9525 विमान हादसे बताते हैं कि जब कॉकपिट में एक पायलट अकेला रह जाता है तो कैसे विमान की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

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