International Money Transfer : दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय भुगतान को आसान और सस्ता बनाने के लिए SWIFT (सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) और कई वैश्विक बैंक मिलकर एक नया पेमेंट सिस्टम शुरू करने जा रहे हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खास तौर पर छोटी कंपनियों और आम उपभोक्ताओं के लिए सीमापार भुगतान को तेज, सस्ता और अधिक पारदर्शी बनाना है। अभी अंतरराष्ट्रीय भुगतान में अक्सर ज्यादा समय लगता है और लागत भी अधिक होती है। नया सिस्टम के लागू होने के बाद इन समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है। इसकी शुरुआत दुनिया के कुछ प्रमुख वित्तीय बाजारों से की जाएगी और धीरे-धीरे इसे अन्य देशों और भुगतान मार्गों तक भी बढ़ाया जाएगा।
नए पेमेंट सिस्टम से छोटे कारोबारियों और उपभोक्ताओं को राहत (तस्वीर-istock)
प्रमुख देशों के बीच भुगतान से होगी शुरुआत
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक नया सिस्टम की शुरुआत उन लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय भुगतान मार्गों से होगी, जिनका उपयोग दुनिया भर में सबसे ज्यादा किया जाता है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कनाडा, चीन, जर्मनी, भारत, पाकिस्तान, स्पेन, थाइलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों के बीच होने वाले भुगतान शामिल हैं। इन मार्गों पर भेजे जाने वाले पैसों में अब कई नई सुविधाएं मिलेंगी। इनमें भुगतान की लागत पहले से तय होना, पूरी राशि का प्राप्तकर्ता तक पहुंचना, पूरे लेनदेन की ट्रैकिंग और तेज गति से भुगतान पूरा होना शामिल है। जहां संभव होगा, वहां तत्काल निपटान यानी तुरंत भुगतान पूरा करने की सुविधा भी दी जाएगी। इससे खासकर उन लोगों को फायदा होगा जो विदेशों में काम करते हैं और अपने परिवार को पैसे भेजते हैं।
जून तक 25 से अधिक बैंक जुड़ेंगे
इस नए सिस्टम की शुरुआत के पहले चरण में दुनिया के 25 से अधिक बैंक शामिल होंगे। ये बैंक जून के अंत तक इस सिस्टम को अपनाना शुरू कर देंगे। शुरुआती चरण में सीमित भुगतान मार्गों पर इसे लागू किया जाएगा ताकि इसकी कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से परखा जा सके। बाद में इसे और अधिक देशों और बैंकों तक बढ़ाया जाएगा। SWIFT का कहना है कि इस पहल का मकसद अंतरराष्ट्रीय भुगतान को उतना ही आसान बनाना है जितना कि घरेलू बैंक ट्रांसफर होता है।
साल के अंत तक बढ़ेंगे और भुगतान मार्ग
संस्था ने बताया कि इस साल के अंत तक और भी भुगतान मार्ग सक्रिय किए जाने की उम्मीद है। इससे दुनिया के विभिन्न हिस्सों के बीच खाता-से-खाता सीमापार लेनदेन और भी तेज और पारदर्शी हो जाएगा। नई प्रणाली के लागू होने के बाद कंपनियों और उपभोक्ताओं को यह भी पता रहेगा कि उनका भुगतान किस चरण में है और कब तक प्राप्तकर्ता के खाते में पहुंचेगा। इससे व्यापारिक लेनदेन में भरोसा बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रेषण पाने वाले देशों को मिलेगा खास फायदा
जिन देशों में इस सिस्टम की शुरुआत की जा रही है, उनमें बांग्लादेश, चीन, जर्मनी, पाकिस्तान और भारत जैसे देश शामिल हैं। ये सभी देश दुनिया में सबसे ज्यादा प्रेषण यानी विदेशों से आने वाले पैसों को प्राप्त करने वाले टॉप दस देशों में आते हैं। इसलिए इन देशों के लोगों को इस नई प्रणाली का सबसे ज्यादा लाभ मिल सकता है। खासकर भारत जैसे देश में जहां लाखों लोग विदेशों में काम करते हैं और नियमित रूप से अपने परिवारों को पैसे भेजते हैं।
जी-20 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर कदम
SWIFT ने सितंबर 2025 में घोषणा की थी कि वह सीमापार भुगतान के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नए नेटवर्क नियम विकसित करेगा। यह पहल G20 के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय भुगतान को तेज, सस्ता और अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके लिए कुछ बैंकों के साथ मिलकर एक स्वैच्छिक गठबंधन बनाया गया है, जो इस नई प्रणाली को लागू करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
पहले से ही तेज है स्विफ्ट का नेटवर्क
संस्था के अनुसार वर्तमान में SWIFT के माध्यम से किए जाने वाले करीब 75 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय भुगतान 10 मिनट या उससे कम समय में गंतव्य बैंक तक पहुंच जाते हैं। यह प्रदर्शन G20 द्वारा तय किए गए लक्ष्य से भी बेहतर माना जाता है। इसके बावजूद संस्था का मानना है कि भुगतान प्रक्रिया के शुरुआती चरण और अंतिम घरेलू चरण में अभी भी सुधार की जरूरत है।
भुगतान अनुभव को और बेहतर बनाने की योजना
नई प्रणाली के जरिए इन शुरुआती और अंतिम चरणों में आने वाली समस्याओं को दूर करने की कोशिश की जाएगी। इससे उपभोक्ताओं और कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय भुगतान करते समय अधिक भरोसेमंद, तेज और पारदर्शी अनुभव मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रणाली सफल रहती है, तो आने वाले समय में वैश्विक भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, प्रेषण और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को भी नई गति मिलने की संभावना है।
