अगर आपके सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) में लंबे समय से बड़ी रकम पड़ी है और आने वाले कुछ महीनों में आपको उस पैसे की जरूरत पड़ सकती है तो Sweep-in Fixed Deposit आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है। आमतौर पर सेविंग्स अकाउंट में रखा पैसा आसानी से उपलब्ध रहता है, लेकिन उस पर एफडी की तुलना में कम ब्याज मिल सकता है। ऐसे में Sweep-in FD सुविधा के जरिए अतिरिक्त रकम को एफडी में डालकर उस पर ज्यादा ब्याज कमाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर पैसे वापस सेविंग्स अकाउंट में लाए जा सकते हैं।
क्या है Sweep in FD (AI Generated Image)
क्या होती है Sweep-in FD?
Sweep-in FD एक ऐसी सुविधा है, जिसमें आपका सेविंग्स या करंट अकाउंट एफडी से लिंक रहता है। इसमें ग्राहक एक निश्चित राशि को सेविंग्स अकाउंट में बनाए रखने का स्तर तय कर सकता है। इस सीमा से ऊपर मौजूद अतिरिक्त रकम अपने आप लिंक्ड एफडी में चली जाती है। यानी आपको हर बार खुद से एफडी बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
मान लीजिए आपके अकाउंट में 5 लाख रुपये हैं और आपको अगले कुछ महीनों तक इस रकम की जरूरत नहीं है। आप अपनी जरूरत के हिसाब से एक निश्चित राशि सेविंग्स अकाउंट में रख सकते हैं और बाकी रकम Sweep-in FD में जा सकती है। इससे अतिरिक्त पैसा एफडी की दर के हिसाब से ब्याज कमा सकता है।
जरूरत पड़ने पर क्या होगा?
Sweep-in FD की सबसे बड़ी खासियत इसका रिवर्स स्विप फीचर है। अगर किसी बड़े पेमेंट के कारण आपके सेविंग्स अकाउंट का बैलेंस तय सीमा से नीचे चला जाता है, तो बैंक लिंक्ड एफडी से जरूरत के अनुसार रकम वापस सेविंग्स अकाउंट में ला सकता है। हालांकि, हर बैंक के नियम अलग हो सकते हैं। कुछ बैंक एफडी को निश्चित यूनिट या राशि में तोड़ते हैं। कुछ बैंकों में यह तय होता है कि कई एफडी में से पहले कौन-सी एफडी तोड़ी जाएगी। इसलिए सुविधा शुरू करने से पहले बैंक के नियमों को समझना जरूरी है।
Threshold राशि सोच-समझकर तय करें
Sweep-in FD का इस्तेमाल करते समय सबसे जरूरी है कि सेविंग्स अकाउंट में कितनी रकम रखनी है, यह सही तरीके से तय किया जाए। केवल बैंक की न्यूनतम सीमा देखकर Threshold तय नहीं करना चाहिए। इसके लिए अपने मासिक खर्च, आने वाले बिल और अचानक होने वाले खर्चों को ध्यान में रखना चाहिए।
उदाहरण के लिए अगर आपका नियमित मासिक खर्च करीब 80,000 रुपये है तो सेविंग्स अकाउंट में 1 लाख रुपये या उससे थोड़ी अधिक राशि रखना एक प्रैक्टिकल बफर हो सकता है। इसके ऊपर की अस्थायी अतिरिक्त रकम को Sweep-in FD में रखा जा सकता है।
