अटके प्रोजेक्ट्स में जान फूंक रहा स्वामी फंड, लाखों खरीदारों का मिल रही घर की चाबी

रियल एस्टेट में तरलता (Liquidity) की कमी, कानूनी विवाद और डेवलपर्स के खराब प्रबंधन ने जिस संकट को जन्म दिया था। स्वामी फंड ने इसे काफी हद तक सुलझाने का काम किया है।

रियल एस्टेट में प्रोजेक्ट समय पर पूरा होना आम बात है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर देशभर में सैंकड़ों प्रोजेक्ट 10 से 12 साल की देरी से चल रहे हैं। हालांकि, RERA आने से इसमें सुधार जरूर हुआ है लेकिन घर खरीदारों को उनके घर की चाबी दिलाने में केंद्र सरकार की स्वामी फंड की अहम भूमिका रही है। इस फंड ने न देशभर में अटके प्रोजेक्ट का काम पूरा करने में मदद की और हजारों घर खरीदारों को सालों बाद घर का मालिकाना हक दिलाया। स्वामी फंड का उद्देश्य किफायती और मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाओं को 'लास्ट माइल फंडिंग' (अंतिम चरण का वित्तपोषण) प्रदान करना, जो धन की कमी के कारण रुकी हुई हैं। आइए समझते हैं कि कैसे यह फंड रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेम चेंजर बना है।

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क्या है स्वामी फंड?

SWAMIH का पूरा नाम 'स्पेशल विंडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउसिंग इन्वेस्टमेंट फंड' है। यह वित्त मंत्रालय द्वारा बनाया गया एक सरकारी समर्थित फंड है, जिसे एसबीआई कैप वेंचर्स लिमिटेड (SBICAP Ventures Ltd) द्वारा मैनेज किया जाता है। बजट 2025-26 में सरकार ने SWAMIH फंड 2.0 की घोषणा की है। इसके लिए 15,000 करोड़ रुपये का नया प्रावधान किया गया है। अगले चरण में 1 लाख अतिरिक्त घरों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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