रियल एस्टेट में प्रोजेक्ट समय पर पूरा होना आम बात है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर देशभर में सैंकड़ों प्रोजेक्ट 10 से 12 साल की देरी से चल रहे हैं। हालांकि, RERA आने से इसमें सुधार जरूर हुआ है लेकिन घर खरीदारों को उनके घर की चाबी दिलाने में केंद्र सरकार की स्वामी फंड की अहम भूमिका रही है। इस फंड ने न देशभर में अटके प्रोजेक्ट का काम पूरा करने में मदद की और हजारों घर खरीदारों को सालों बाद घर का मालिकाना हक दिलाया। स्वामी फंड का उद्देश्य किफायती और मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाओं को 'लास्ट माइल फंडिंग' (अंतिम चरण का वित्तपोषण) प्रदान करना, जो धन की कमी के कारण रुकी हुई हैं। आइए समझते हैं कि कैसे यह फंड रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेम चेंजर बना है।
रियल एस्टेट
क्या है स्वामी फंड?
SWAMIH का पूरा नाम 'स्पेशल विंडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउसिंग इन्वेस्टमेंट फंड' है। यह वित्त मंत्रालय द्वारा बनाया गया एक सरकारी समर्थित फंड है, जिसे एसबीआई कैप वेंचर्स लिमिटेड (SBICAP Ventures Ltd) द्वारा मैनेज किया जाता है। बजट 2025-26 में सरकार ने SWAMIH फंड 2.0 की घोषणा की है। इसके लिए 15,000 करोड़ रुपये का नया प्रावधान किया गया है। अगले चरण में 1 लाख अतिरिक्त घरों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
लाखों घरों का इंतजार धीरे-धीरे खत्म हो रहा
PropEquity के डेटा के अनुसार, अगस्त 2024 तक भारत के 42 शहरों में लगभग 1,981 प्रोजेक्ट्स ठप पड़े थे, जिनमें 5.08 लाख से अधिक फ्लैट्स का निर्माण अधूरा था। इसमें सबसे खराब स्थिति दिल्ली-एनसीआर की रही, जो कुल ठप पड़े प्रोजेक्ट्स का लगभग 44% हिस्सा है। अकेले दिल्ली-एनसीआर में 495 प्रोजेक्ट्स में 1.92 लाख घर अधूरे थे। हालांकि, अब इसमें तेजी से सुधार हो रहा है। इस फंड की बदौलत कई अटके प्रोजेक्ट का काम पूरा हो रहा है और लोगों को उनके फ्लैट की चाबी मिल रही है।
61,000 घर पूरे कर खरीदारों को सौंपे
स्वामी फंड से अबतक 110 प्रोजेक्ट्स में लगभग 61,000 घर पूरे कर खरीदारों को सौंपे जा चुके हैं। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 7,000 से अधिक इकाइयां शामिल हैं। अब लक्ष्य 1 लाख घरों तक पहुंचने का है। इस फंड ने देश भर में 127 परियोजनाओं में 37,400 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी को अनलॉक किया है। स्वामी फंड ने न केवल सामाजिक जिम्मेदारी निभाई, बल्कि व्यावसायिक लाभ भी दिखाया। इसने सरकार से ली गई पूंजी का लगभग 50% (3,500 करोड़ रुपये) वापस भी कर दिया है।
सफलता की कहानी
स्वामी फंड की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक आम्रपाली ग्रुप के प्रोजेक्ट्स हैं। 2021 में, जब आम्रपाली के प्रोजेक्ट्स पूरी तरह फंसे हुए थे। इस फंड की बदौलत आज हजारों आम्रपाली खरीदारों को उनके घरों का कब्जा मिल रहा है। इसके अलावा, कैपिटल एथेना, अंतरिक्ष वैली, और पंचशील ग्रीन्स जैसे कई प्रोजेक्ट्स इसी फंड की बदौलत दोबारा शुरू हो सके। अब इन प्रोजेक्ट में घर खरीदारों को उनका फ्लैट हैंड होवर किया जा रहा है।
निजी फंड और NCLT की भी भूमिका
सरकारी पहल के अलावा कई निजी रियल एस्टेट फंड (AIF) भी अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने में जुटे हैं। कई परियोजनाएं जैसे जेपी इन्फ्राटेक, आरजी ग्रुप की आरजी लक्जरी होम्स और रीयरको द्वारा केवीडी विंड पार्क को एनसीएलटी (NCLT) के जरिए रेसोल्यूशन से पूरा कराया जा रहा है।
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
रियल एस्टेट सेक्टर में अधूरी परियोजनाओं को पूरा कराने में स्वामी फंड और वैकल्पिक (AIF) फंड्स अहम भूमिका निभा रहे हैं। ले.क. अश्वनी नागपाल के अनुसार, इस फंड मिलना आसान नहीं, बल्कि यह डेवलपर की मैनेजमेंट क्षमता और रणनीति पर भरोसे की मुहर है। रीयरको की एमडी गीतांजलि खन्ना के मुताबिक, बेहतर योजना, समयबद्ध निर्माण और मजबूत वित्तीय प्रबंधन के दम पर हमें यह फंड मिला। हमने प्रोजेक्ट को पहले इंसॉल्वेंसी से बाहर निकालकर अब पजेशन देना प्राथमिकता है।
रेनॉक्स ग्रुप के चेयरमैन शैलेन्द्र शर्मा के अनुसार, बकाया चुकाने और परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने में इस फंड की बड़ी भूमिका है। दिनेश गुप्ता, अध्यक्ष, CREDAI वेस्टर्न UP का कहना है कि फंडिंग ही सबसे अहम कड़ी है। नकदी की कमी से रुका निर्माण निवेश से फिर शुरू होता है और भरोसा लौटता है। हिमांशु गर्ग, निदेशक, RG Group के अनुसार, NCLT के जरिए मिली परियोजना में 3 साल में काम पूरा कर अब पजेशन और रजिस्ट्री दी जा रही है।
