Anil Ambani News: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (23 जनवरी 2025) को अनिल अंबानी और उनके ग्रुप, अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) को एक जनहित याचिका के मामले में नए नोटिस जारी किए। यह याचिका पूर्व केंद्रीय सचिव ई. ए. एस. शर्मा द्वारा दायर की गई थी, जिसमें कंपनी और उसके समूह की कंपनियों पर बड़े पैमाने पर बैंकिंग और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच में किसी तरह की देरी न हो और सभी पहलुओं पर अदालत की निगरानी रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ी जनहित याचिका पर अनिल अंबानी,एडीएजी को जारी किए नए नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतिम चेतावनी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की बैंच ने कहा कि अनिल अंबानी और एडीएजी को पहले ही नोटिस तामील किए जा चुके हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह उनकी ओर से पेश होने और अपना जवाब दाखिल करने का अंतिम मौका है। साथ ही, बंबई उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया कि वे नोटिस का पालन सुनिश्चित करें और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की अगली सुनवाई 10 दिन बाद निर्धारित की है। इससे पहले भी याचिकाकर्ता ई. ए. एस. शर्मा की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में कई निवेदन दाखिल किए थे। अदालत ने दोनों पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर अपने जवाब दाखिल करने को कहा था और सुनवाई को तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया था।
आरोपों का सार
भूषण ने अदालत में बताया कि जांच एजेंसियां इस बड़े बैंकिंग घोटाले में बैंकों और उनके अधिकारियों की कथित संलिप्तता की जांच नहीं कर रही हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि सीबीआई और ईडी को निर्देश दिए जाएं कि वे इस मामले में बैंकों और उनके अधिकारियों के खिलाफ जारी जांच की स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश करें। भूषण ने इस मामले को संभवतः भारत के इतिहास की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट धोखाधड़ी करार दिया। उन्होंने बताया कि एफआईआर 2025 में दर्ज की गई थी, जबकि कथित धोखाधड़ी 2007-08 से शुरू हुई थी। इसका मतलब है कि मामले में देरी होने के बावजूद जांच एजेंसियों की सक्रियता पर सवाल उठते हैं।
अदालत की निगरानी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के बड़े वित्तीय मामलों में अदालत की निगरानी जरूरी है। इससे न केवल धोखाधड़ी का सही तरीके से पता चलेगा, बल्कि बैंकों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का भी निष्पक्ष मूल्यांकन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने निष्कर्ष और जांच की स्थिति को पूरी पारदर्शिता के साथ रिपोर्ट करें। अदालत का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से काम करें।
अनिल अंबानी और एडीएजी के खिलाफ यह मामला कॉरपोरेट धोखाधड़ी और बैंकिंग घोटाले की गंभीरता को दर्शाता है। अदालत की निगरानी में जांच और समय पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करना दोनों ही पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होगा। अब देखना यह होगा कि अनिल अंबानी और उनके समूह इस नोटिस के जवाब में क्या कदम उठाते हैं और जांच एजेंसियां अपने निष्कर्ष कब तक अदालत के सामने प्रस्तुत करती हैं।
