म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन का सबसे बेहतरीन जरिया माना जाता है, लेकिन जब बाजार में उतार-चढ़ाव आता है या कोई फंड उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करता, तो निवेशकों को अपनी एसआईपी (SIP) घाटे में चलती हुई दिखाई देने लगती है। ऐसे समय में अक्सर निवेशक असमंजस में पड़ जाते हैं और घबराहट में अपनी एसआईपी बंद करने या फंड बदलने का फैसला जल्दबाजी में ले लेते हैं। एसआईपी के रिटर्न में अस्थाई गिरावट आना बेहद आम बात है, लेकिन एक समझदार निवेशक बनने के लिए आपको यह पता होना चाहिए कि कब अपने मौजूदा म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में टिके रहना (Stay) फायदेमंद है और किस मोड़ पर आकर दूसरे बेहतर फंड में स्विच (Switch) कर जाना सही रणनीति होती है।
क्या है म्यूचुअल फंड में 'Stay' या 'Switch' करने का सीक्रेट फॉर्मूला
इस फैसले को लेने का एक सटीक और वैज्ञानिक फॉर्मूला होता है, जो बाजार के तात्कालिक उतार-चढ़ाव और किसी फंड के दीर्घकालिक खराब प्रदर्शन के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है, जिससे निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई को नुकसान से बचा सकते हैं।
क्या है Stay का फार्मूला?
अगर आपकी एसआईपी सिर्फ इसलिए घाटे में चल रही है क्योंकि पूरा शेयर बाजार मंदी या करेक्शन के दौर से गुजर रहा है, तो ऐसी स्थिति में फंड में बने रहना (Stay Invested) ही सबसे समझदारी भरा निर्णय होता है; क्योंकि बाजार की इस गिरावट में आपको 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee Cost Averaging) का सबसे बड़ा फायदा मिलता है और आपको उसी मासिक निवेश पर म्यूचुअल फंड की अधिक यूनिट्स अलॉट होती हैं, जो भविष्य में बाजार के रिकवर होने पर आपके रिटर्न को तेजी से बढ़ा देती हैं।
Switch का क्या है फार्मूला?
हालांकि, अगर बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, उसके बावजूद आपका फंड लगातार पिछले 1.5 से 2 सालों से अपने बेंचमार्क इंडेक्स (जैसे Nifty 50 या Sensex) और अपने ही कैटेगरी के दूसरे टॉप-परफॉर्मिंग फंड्स (Peer Funds) की तुलना में बेहद खराब रिटर्न दे रहा है, तो यह एक स्पष्ट संकेत है कि अब आपको उस स्कीम से बाहर निकलकर किसी दूसरे बेहतर फंड में स्विच (Switch) कर लेना चाहिए। इसके अलावा, फंड मैनेजर का बदलना, फंड हाउस की निवेश रणनीति में बड़ा बदलाव आना या आपकी व्यक्तिगत वित्तीय प्राथमिकताओं और रिस्क प्रोफाइल का बदल जाना भी फंड स्विच करने के बड़े कारण हो सकते हैं।
एग्जिट करने से पहले ध्यान रखें ये बात
म्यूचुअल फंड से बाहर निकलने या स्विच करने की प्रक्रिया में निवेशकों को कुछ तकनीकी और टैक्स संबंधी बातों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि किसी भी इक्विटी म्यूचुअल फंड में 1 साल से पहले यूनिट्स बेचने या स्विच करने पर 1% का 'एग्जिट लोड' (Exit Load) देना पड़ सकता है, और इसके साथ ही 1 साल से पहले हुए मुनाफे पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (STCG) व 1 साल के बाद ₹1.25 लाख से अधिक के मुनाफे पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) भी लागू होता है।
