भारत में सोने के साथ-साथ चांदी को भी बेहद पवित्र और निवेश के लिहाज से एक बेहतरीन धातु माना जाता है। शादियों का सीजन हो, दिवाली-धनतेरस का त्योहार हो या फिर बच्चों का मुंडन, हमारे यहां चांदी के सिक्के, बर्तन और गहने खरीदने की पुरानी परंपरा रही है। लेकिन अगर आप भी हाल-फिलहाल में चांदी की कोई चीज खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको बहुत ज्यादा सावधान होने की जरूरत है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने देश भर के उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। इस अलर्ट के मुताबिक, देश के सराफा बाजारों में धड़ल्ले से मिलावटी और नकली चांदी (Fake Silver) के गहने और सिक्के बेचे जा रहे हैं। मुनाफा कमाने के चक्कर में कई बेईमान कारोबारी असली चांदी (Silver) के नाम पर ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं। ऐसे में बिना पूरी जांच-परख के चांदी खरीदना आपके लिए बड़ा आर्थिक नुकसान साबित हो सकता है।
चांदी में कैसे हो रही है मिलावट?
बाजार में चल रहे इस मिलावट के खेल को समझें तो पता चलता है कि ठग बेहद शातिर तरीके से काम कर रहे हैं। चांदी के गहनों और सिक्कों में जस्ता (Zinc), तांबा (Copper), और निकेल जैसी सस्ती धातुओं की भारी मिलावट की जा रही है। कई मामलों में तो चांदी के ऊपर सिर्फ चमकीली पॉलिश कर दी जाती है, जबकि उसके अंदर बेहद सस्ती और कम मूल्य वाली धातुएं भरी होती हैं। आम ग्राहक के लिए सिर्फ देखकर असली और नकली चांदी में फर्क करना लगभग असंभव होता है, क्योंकि नकली चांदी भी उतनी ही चमकती है जितनी कि असली। इसका नतीजा यह होता है कि ग्राहक शुद्ध चांदी के भाव में नकली या घटिया क्वालिटी का सामान घर ले आते हैं। जब बाद में वे इसे दोबारा बेचने या बदलने जाते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि उनकी चांदी की कोई कीमत ही नहीं है।
कैसे चेक करें चांदी असली है या नकली?
इस बड़े धोखे से आम जनता को बचाने के लिए ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सख्त नियम बनाए हैं और ग्राहकों को जागरूक होने की सलाह दी है। बीआईएस (BIS) के नियमों के अनुसार, जिस तरह सोने की शुद्धता के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य है, ठीक उसी तरह चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों के लिए भी हॉलमार्किंग की व्यवस्था की गई है। हालांकि, सोने की तरह चांदी पर अभी हॉलमार्किंग पूरी तरह अनिवार्य (Mandatory) नहीं की गई है, यह स्वैच्छिक है, लेकिन इसके बावजूद देश के प्रतिष्ठित और ईमानदार जौहरी बीआईएस हॉलमार्क वाले चांदी के उत्पाद ही बेचते हैं। जब भी आप चांदी खरीदें, तो उस पर तीन प्रमुख निशान जरूर चेक करें। पहला है बीआईएस का त्रिकोणीय लोगो (Logo), दूसरा है चांदी की शुद्धता का ग्रेड (जैसे 999, 925, 900, 835, या 800) और तीसरा है छह अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक कोड, जिसे एचयूआईडी (HUID) नंबर कहा जाता है।
लिखा होता है सीक्रेट कोड
चांदी की शुद्धता के ये ग्रेड ग्राहकों के लिए समझना बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए, अगर आपके चांदी के सिक्के या बर्तन पर '999' लिखा है, तो इसका मतलब है कि वह 99.9% शुद्ध चांदी है, जिसे 'फाइन सिल्वर' कहा जाता है। आमतौर पर सिक्के और बार (बिस्कुट) इसी शुद्धता के होते हैं। वहीं, गहने बनाने के लिए '925' ग्रेड का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे 'स्टर्लिंग सिल्वर' कहते हैं। इसमें 92.5% शुद्ध चांदी होती है और बाकी हिस्सा मजबूती के लिए दूसरी धातु का होता है। अगर आपके गहनों पर इनमें से कोई निशान नहीं है या सुनार आपको बिना पक्के बिल के चांदी दे रहा है, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला है। नकली चांदी के इस जाल से बचने के लिए हमेशा बीआईएस रजिस्टर्ड ज्वैलर से ही खरीदारी करें और बिल पर शुद्धता का विवरण जरूर लिखवाएं। आपकी थोड़ी सी सतर्कता आपको धोखेबाजों से बचा सकती है।
