भारतीय शेयर बाजार के नियामक SEBI की 23 मार्च, 2026 की बोर्ड बैठक में बाजार को अधिक लचीला और निवेशक-अनुकूल बनाने के मकसद से कई अहम फैसले लिए। AIF नियमों में ढील देकर फंड बंद करने की प्रक्रिया आसान की गई है। वहीं, विदेशी निवेगश यानी FII/FPIs के लिए नेट सेटलमेंट की मंजूरी देकर लागत घटाने का रास्ता खोला गया है। इसके अलावा सोशल स्टॉक एक्सचेंज में रिटेल निवेश की सीमा घटाकर भागीदारी बढ़ाई गई है। वहीं, REIT और InvIT के निवेश नियम सरल किए गए हैं। इसके साथ ही ब्रोकर और इंटरमीडियरी के ‘Fit and Proper’ मानकों को संतुलित बनाया गया है। कुल मिलाकर, ये फैसले बाजार में लिक्विडिटी, पारदर्शिता और निवेश के अवसर बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे (Image Credit SEBI)
AIF स्कीम बंद करना हुआ आसान
SEBI ने Alternative Investment Funds (AIF) के लिए स्कीम बंद करने और रजिस्ट्रेशन सरेंडर की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। फंड मैनेजरों के लिए यह राहत इसलिए है़ क्योंकि पहले स्कीम बंद करते समय पूरी रकम तुरंत निवेशकों को लौटानी पड़ती थी और बैंक बैलेंस शून्य करना जरूरी होता था। अगर टैक्स नोटिस, कानूनी विवाद या कोई बकाया खर्च बच जाता था, तो फंड को जबरन चालू रखना पड़ता था और भारी कंप्लायंस बोझ उठाना पड़ता था। अब वे ऐसी स्थितियों में सीमित रकम रोककर स्कीम को बंद कर सकते हैं, जिससे ऑपरेशनल झंझट और लागत दोनों कम होंगे।
वहीं, निवेशकों के लिए फायदा यह है कि उन्हें अब फंड के कृत्रिम रूप से लंबे समय तक खिंचने की समस्या से राहत मिलेगी। स्कीम समय पर बंद होगी और ज्यादातर पैसा जल्दी वापस मिल सकेगा, जबकि बची हुई राशि केवल जरूरी दायित्वों के लिए रोकी जाएगी। इससे निवेशकों का पैसा ज्यादा समय तक फंसा नहीं रहेगा और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
FPI के लिए नेट सेटलमेंट, लागत में कमी
Foreign Portfolio Investors के लिए नेट सेटलमेंट सिस्टम की मंजूरी बड़ा गेमचेंजर है। अब खरीद और बिक्री के लेन-देन को आपस में समायोजित कर सेटल किया जा सकेगा, जिससे फंडिंग लागत और करेंसी लॉस घटेगा। खासकर इंडेक्स रीबैलेंसिंग जैसे दिनों में यह व्यवस्था एफपीआई के लिए राहत लेकर आएगी।
रिटेल निवेशकों के लिए बड़ा मौका
SEBI ने Social Impact Fund में निवेश की न्यूनतम सीमा को 2 लाख रुपये से घटाकर सिर्फ 1,000 रुपये कर दिया है। इससे छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी और सोशल स्टॉक एक्सचेंज को नई गहराई मिलेगी। यह कदम सामाजिक परियोजनाओं में फंडिंग बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
REIT और InvIT को नए निवेश विकल्प
REIT और InvIT से जुड़े नियमों में ढील देकर SEBI ने इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने का संकेत दिया है। अब प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद भी SPV में निवेश बनाए रखने की अनुमति होगी। इसके अलावा निवेश विकल्प बढ़ाए गए हैं और ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में निवेश की छूट दी गई है, जिससे सेक्टर में निवेश का दायरा बढ़ेगा।
इंटरमीडियरी नियमों में संतुलन, सख्ती भी बरकरार
‘Fit and Proper’ नियमों में बदलाव कर SEBI ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। अब केवल FIR दर्ज होने पर स्वतः अयोग्यता नहीं होगी, बल्कि हर मामले को अलग-अलग देखा जाएगा। वहीं आर्थिक अपराधों पर सख्ती बढ़ाई गई है और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है, जिससे बाजार में भरोसा मजबूत होगा।
