SEBI New Rules: मर्जर एवं अधिग्रहण डील्स (Merger & Acquisition Deals) को अटकलों से बचाने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने मंगलवार को ऐसे मामलों में ट्रांजेक्शन के लिए शेयर का प्राइस लेवल तय करने का एक फ्रेमवर्क पेश किया। बाजार में अफवाहों (Market Rumours) की वजह से शेयर की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की घटनाओं के बीच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अफवाहों की पुष्टि के लिए एक डिटेल्ड क्राइटेरिया पेश किया है जो एक जून से टॉप 100 लिस्टेड कंपनियों पर लागू होंगे। दिसंबर 2024 से ये अगली 150 कंपनियों के लिए लागू होगा।
SEBI ला रही नया नियम
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ये होगा नया नियम
नए नियम के अनुसार, लिस्टेड कंपनी को मार्केट में अफवाहों की पुष्टि तब करनी होगी जब उसके शेयर प्राइस में कोई बड़ा परिवर्तन आए। इस मामले में सेबी सर्कुलर में कहा गया है कि अप्रभावित मूल्य (Unaffected Price) उन लेन-देन के लिए माना जाएगा जिन पर सेबी या स्टॉक एक्सचेंज द्वारा प्राइसिंग नियम लागू होते हैं, बशर्ते कि ऐसे लेन-देन से संबंधित अफवाह की पुष्टि महत्वपूर्ण प्राइस चेंज के ट्रिगर होने के 24 घंटे के भीतर हो गई हो।
क्या होती है अप्रभावित कीमत
इस बीच, सेबी ने बाजार में अटकलों की पुष्टि होने पर लेनदेन के लिए अप्रभावित मूल्य पर विचार करने के लिए एक रूपरेखा जारी की है। आम तौर पर बाजार में कोई अटकल न होने की स्थिति में किसी कंपनी के शेयर प्राइस को अप्रभावित कीमत कहा जाता है।
मर्जर-अधिग्रहण सौदों के दौरान शेयर कीमतों में उतार-चढ़ाव ट्रांजेक्शन की ऑवरऑल कीमत को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सेबी ने शेयर की एक अप्रभावित कीमत पर विचार करने का प्रस्ताव दिया है।
