Saving vs Investment: आमतौर पर जब भी पैसों की बात होती है तो बचत (Saving) और निवेश (Investment) दो शब्द सुनने को मिलते हैं। कई लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि इनके उद्देश्य अलग होते हैं। आइए बचत और निवेश के बीच अंतर समझते हैं-
बचत और निवेश में क्या अंतर है (Photo: iStock)
बचत क्या है?
बचत का मतलब है अपनी कमाई में से कुछ पैसा खर्च करने के बाद या खर्च करने से पहले अलग रखना। इस पैसे का इस्तेमाल आमतौर पर छोटी या अचानक आने वाली जरूरतों के लिए किया जाता है।
उदाहरण के लिए अगर आपकी महीने की सैलरी 40,000 रुपये है और आप इसमें से 5,000 रुपये अलग रख देते हैं तो यह आपकी बचत है। इस पैसे को ऐसे जगह रखना बेहतर होता है, जहां जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके।
बचत के लिए Savings Account, Recurring Deposit (RD) या Short-Term Fixed Deposit (FD) जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इनमें पैसा रखने का उद्देश्य ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि पैसे को सुरक्षित और जरूरत के समय उपलब्ध रखना होना चाहिए।
निवेश क्या है?
निवेश का मतलब है अपने पैसे को ऐसे विकल्पों में लगाना, जहां समय के साथ उसके बढ़ने की संभावना हो। निवेश आमतौर पर लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
उदाहरण के लिए बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, रिटायरमेंट या भविष्य के किसी बड़े खर्च के लिए लंबे समय तक पैसा जमा करना हो तो निवेश के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। Mutual Fund, SIP, PPF और Shares जैसे अलग-अलग निवेश विकल्प मौजूद हैं।
हालांकि, निवेश में रिटर्न की गारंटी हर जगह नहीं होती। खासकर बाजार से जुड़े निवेश में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले अपने लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को समझना जरूरी है।
Saving और Investment में सबसे बड़ा अंतर
बचत और निवेश में सबसे बड़ा अंतर उनके उद्देश्य और समय अवधि का है। बचत आमतौर पर छोटी अवधि और तुरंत जरूरतों के लिए होती है, जबकि निवेश लंबे समय के लक्ष्यों के लिए किया जाता है। बचत का मुख्य मकसद पैसे को सुरक्षित रखना और जरूरत के समय आसानी से इस्तेमाल करना होता है, जबकि निवेश का लक्ष्य समय के साथ पैसे को बढ़ाना होता है।
पैसा कहां रखा जाना चाहिए?
पैसा कहां रखा जाना चाहिए यह पूरी तरह आपके लक्ष्य और पैसे की जरूरत के समय पर निर्भर करता है। सबसे पहले अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा अलग-अलग हिस्सों में बांटना बेहतर तरीका हो सकता है-
रोजमर्रा और तुरंत जरूरत के पैसे को Savings Account में रखा जा सकता है।
अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग फंड (Emergency Fund) रखें। इसे ऐसे सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध विकल्प में रखना बेहतर है, जहां जरूरत पड़ने पर पैसा निकाला जा सके।
1-3 साल के लक्ष्य के लिए कम जोखिम वाले विकल्प जैसे FD या RD पर विचार किया जा सकता है। सही विकल्प चुनने से पहले ब्याज दर और समय से पहले निकासी के नियम जरूर देखें।
लंबे समय के लक्ष्य के लिए Mutual Funds, SIP, PPF आदि विकल्पों पर लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार विचार किया जा सकता है।
