Mutual Fund Redemption: कुछ समय पहले तक म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) को रिडीम (म्यूचुअल फंड यूनिट बेचकर पैसा निकालना) करना एक लंबी और थकाऊ प्रॉसेस थी। निवेश राशि निकालने के लिए ब्रांच में जाकर लंबे-चौड़े फॉर्म भरने होते थे। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में यह प्रॉसेस बहुत आसान हो गई है।
म्यूचुअल फंड से जुड़ी 5 अहम बातें
मगर अब आपको किसी ब्रांच में जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब घर बैठे एक क्लिक पर सारा पैसा निकाला जा सकता है। लेकिन आपको अपनी म्यूचुअल फंड योजना को रिडीम करने में जल्दीबाजी नहीं करनी चाहिए। बल्कि बुनियादी 5 बातों पर ध्यान देना चाहिए।
घबरा कर जल्दी न निकालें पैसा
अधिकतर फंड इक्विटी मार्केट से लिंक होते हैं। शेयर बाजार में गिरावट पर म्यूचुअल फंड की एनएवी (नेट एसे वैल्यू) कम हो सकती है। उस समय आपको लगेगा कि आपको घाटा हो रहा है। पर घबरा कर जल्दी पैसा न निकालें।
एग्जिट लोड जरूर चेक करें
म्यूचुअल फंड स्कीम में एक टाइम लिमिट होती है। यदि आप उससे पहले रिडीम करें तो एग्जिट लोड लगता है। उससे बचने के लिए टाइम लिमिट के बाद ही पैसा निकालें।
बिना सोचे-समझे रीइन्वेस्टमेंट
कभी कभी लोगों को लगता है कि जिस स्कीम में उनका पैसा लगा है उसके बजाय कोई और स्कीम अच्छा परफॉर्म कर रही है। मगर ऐसा नहीं होता, क्योंकि अलग-अलग स्कीम पर विभिन्न स्कीम बेहतर परफॉर्मेंस करती हैं।
टैक्स का पहलू भी अहम
2018 से पहले इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश को एक साल से अधिक रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) लगता था, जो जीरो था। उसके बाद एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक के लाभ पर 10% का LTCG लागू किया गया। केवल शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स पर आप कुछ कर सकते हैं।
जब इक्विटी फंड में से 1 साल से पहले निवेश निकाला जाता है तो STCG 15% होता है। एक वर्ष पूरा होने से पहले पैसा निकालने की जल्दबाजी के बजाय, आप निवेश बरकरार रखें और एसटीसीजी टैक्स के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
केवाईसी हो अपडेट
आपकी केवाईसी अपडेट रहनी चाहिए। वरना आपको म्यूचुअल फंड रिडीम करने में दिक्कत आ सकती है।
डिस्क्लेमर : यहां म्यूचुअल फंड से जुड़ी जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। म्यूचुअल फंड में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
